All topics

Varsha Ritu Par Nibandh: वर्षा ऋतु पर निबंध (बसंत, ग्रीष्म, शीत और शरद ऋतु सहित)

Hindi and Marathi 12 essays, speeches and lines Updated 10 Oct 2026

Varsha ritu par nibandh (वर्षा ऋतु पर निबंध) के इस पेज पर हर कक्षा के लिए बरसात के मौसम पर तैयार सामग्री दी गई है। छोटी कक्षाओं के लिए बरसात पर आसान 10 पंक्तियाँ और कक्षा 5 के लिए दूसरा सेट है, साथ ही 100, 150, 300 और 500 शब्दों के निबंध और 2 मिनट का भाषण भी है। परीक्षा में दूसरी ऋतुएँ भी पूछी जाती हैं, इसलिए बसंत ऋतु, ग्रीष्म ऋतु, शीत ऋतु और शरद ऋतु पर छोटे निबंध और शीतकालीन अवकाश पर 10 पंक्तियाँ भी जोड़ी गई हैं।

मानसून कब और कहाँ से आता है, सावन-भादों के महीने और खरीफ़ फसलें, ये तथ्य परीक्षा में बहुत काम आते हैं। इनके साथ अपने शहर या गाँव की पहली बारिश, भीगते स्कूल के रास्ते या बरसाती पकौड़ों जैसी अपनी यादें जोड़ें। अंग्रेज़ी में यही विषय चाहिए तो हमारा Rainy Season Essay पेज देखें।

Varsha Ritu Par Nibandh 10 Lines: वर्षा ऋतु पर 10 पंक्तियाँ

10 पंक्तियाँकक्षा 1 से 387 शब्द

  1. वर्षा ऋतु को बरसात का मौसम भी कहते हैं।
  2. यह ऋतु गर्मी के बाद जून महीने में आती है।
  3. आसमान में काले-काले बादल छा जाते हैं।
  4. बिजली चमकती है और बादल ज़ोर से गरजते हैं।
  5. बारिश से पेड़-पौधे हरे-भरे हो जाते हैं।
  6. मेंढक टर्र-टर्र करते हैं और मोर नाचते हैं।
  7. बच्चे पानी में कागज़ की नाव चलाते हैं।
  8. हम छाता और रेनकोट लेकर स्कूल जाते हैं।
  9. किसान खुश होते हैं क्योंकि खेतों को पानी मिलता है।
  10. मुझे बारिश में भीगी मिट्टी की खुशबू बहुत अच्छी लगती है।
वर्षा ऋतु पर 10 पंक्तियाँ लिखे हुए नोटबुक पेज पर
इसे सेव करें या प्रिंट करें

10 Lines on Rainy Season in Hindi: कक्षा 5 के लिए वर्षा ऋतु पर 10 पंक्तियाँ

10 पंक्तियाँकक्षा 4 से 6149 शब्द

  1. भारत में वर्षा ऋतु मानसूनी हवाओं के साथ आती है और प्रायः जून से सितंबर तक रहती है।
  2. मानसून सबसे पहले जून के पहले सप्ताह में केरल के तट पर पहुँचता है।
  3. मई की तपती लू के बाद पहली बारिश से लोगों और पशु-पक्षियों को बड़ी राहत मिलती है।
  4. नदियाँ, तालाब, कुएँ और झीलें फिर से पानी से भर जाती हैं।
  5. किसान इसी समय धान, मक्का, कपास और सोयाबीन जैसी खरीफ़ फसलें बोते हैं।
  6. सावन में पेड़ों पर झूले पड़ते हैं और महिलाएँ लोकगीत गाती हैं।
  7. बरसात की शाम को घरों में गरम पकौड़े, भुट्टे और चाय का आनंद लिया जाता है।
  8. ज़्यादा बारिश से कई जगह बाढ़ आ जाती है और सड़कों पर पानी भर जाता है।
  9. रुके हुए पानी में मच्छर पनपते हैं, जिनसे मलेरिया और डेंगू जैसे रोग फैलते हैं।
  10. वर्षा ऋतु को भारत की जीवन-रेखा कहा जाता है, क्योंकि हमारी खेती इसी पर निर्भर है।

Varsha Ritu Nibandh: वर्षा ऋतु पर निबंध 100 शब्द

कक्षा 2 से 4101 शब्द

जेठ की कड़ी धूप से जब धरती तपने लगती है, तब सबको बादलों का इंतज़ार होता है। जून में मानसून आते ही आसमान में काली घटाएँ छा जाती हैं और ठंडी फुहारें पड़ने लगती हैं। सूखी धरती की प्यास बुझ जाती है और चारों ओर हरियाली छा जाती है।

बच्चे आँगन में भीगते हैं और नाव चलाते हैं। किसान हल चलाकर धान की रोपाई करते हैं। तालाब और कुएँ भर जाते हैं। अधिक वर्षा से कभी-कभी बाढ़ भी आती है और मच्छर बढ़ जाते हैं। फिर भी वर्षा ऋतु हमारे लिए वरदान है, क्योंकि इसी से साल भर पानी मिलता है।

Varsha Ritu Par Nibandh in Hindi 150 Words: वर्षा ऋतु पर निबंध 150 शब्द

कक्षा 4 से 6138 शब्द

भारत की छह ऋतुओं में वर्षा ऋतु की सबसे अधिक प्रतीक्षा की जाती है। भारतीय पंचांग के अनुसार सावन और भादों इसके महीने हैं, पर मानसून की बारिश प्रायः जून से सितंबर तक चलती है। अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से आने वाली नम हवाएँ बादल लेकर आती हैं और पूरे देश में बरसती हैं।

बरसात आते ही प्रकृति का रूप बदल जाता है। सूखे खेत लहलहा उठते हैं, पहाड़ों पर झरने बहने लगते हैं और बाग-बगीचों में नई कोंपलें फूटती हैं। कोयल कूकती है, पपीहा बोलता है और मोर पंख फैलाकर नाचते हैं। गाँवों में सावन के झूले और कजरी के गीत इस ऋतु की शोभा बढ़ाते हैं।

वर्षा हमारी खेती का आधार है। इसी से बाँध, नदियाँ और भूजल भरते हैं। हमें वर्षा के जल को बचाना चाहिए और सफ़ाई रखकर बीमारियों से बचना चाहिए।

Varsha Ritu Nibandh in Hindi: वर्षा ऋतु पर निबंध 300 शब्द

कक्षा 6 से 8278 शब्द

गर्मी के लंबे दिनों के बाद जब पहली बार बादल गरजते हैं, तो ऐसा लगता है मानो पूरी प्रकृति ने राहत की साँस ली हो। मिट्टी की सौंधी खुशबू हवा में घुल जाती है और बच्चे खुशी से छत की ओर दौड़ पड़ते हैं। यही है वर्षा ऋतु, जिसे ऋतुओं की रानी भी कहा जाता है।

गर्मियों में भारत की भूमि समुद्र की तुलना में जल्दी गरम हो जाती है। इससे समुद्र की ओर से नमी भरी दक्षिण-पश्चिमी मानसूनी हवाएँ भूमि की ओर चलती हैं। ये हवाएँ जून के आरंभ में केरल पहुँचती हैं और जुलाई तक लगभग पूरे देश में छा जाती हैं। सितंबर के अंत तक मानसून लौटने लगता है।

इस ऋतु में धरती दुल्हन की तरह सज जाती है। धान के खेतों में पानी भरा रहता है, तालाबों में कमल खिलते हैं और नदियाँ किनारों तक भरकर बहती हैं। गाँवों में किसान खेत जोतते हैं और महिलाएँ मिलकर धान की रोपाई करती हैं। शहरों में लोग गरम चाय और पकौड़ों के साथ बारिश का आनंद लेते हैं। तीज और रक्षाबंधन जैसे त्योहार भी इसी मौसम में आते हैं।

वर्षा ऋतु की कुछ समस्याएँ भी हैं। लगातार वर्षा से नदियों में बाढ़ आ जाती है, कच्चे मकान गिर जाते हैं और फसलें बह जाती हैं। पहाड़ों पर भूस्खलन से रास्ते बंद हो जाते हैं। शहरों में नालियाँ जाम होने से सड़कें तालाब बन जाती हैं। गंदे पानी और मच्छरों से हैजा, टाइफ़ाइड, मलेरिया और डेंगू फैलते हैं।

फिर भी वर्षा के बिना जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती। हमें छत पर वर्षा जल संचयन करना चाहिए, पेड़ लगाने चाहिए और आसपास पानी जमा नहीं होने देना चाहिए। तभी यह ऋतु सच्चे अर्थों में वरदान बनेगी।

Varsha Ritu Par Nibandh Hindi Mein: वर्षा ऋतु पर निबंध 500 शब्द

कक्षा 7 से 10483 शब्द

प्रस्तावना

भारत को ऋतुओं का देश कहा जाता है। हमारे पंचांग में छह ऋतुएँ बताई गई हैं: वसंत, ग्रीष्म, वर्षा, शरद, हेमंत और शिशिर। इन सबमें वर्षा ऋतु का स्थान विशेष है, क्योंकि यही ऋतु धरती की प्यास बुझाती है और अन्न उपजाने का आधार बनती है। कवियों ने इसके सौंदर्य पर अनगिनत गीत और कविताएँ लिखी हैं।

मानसून का आगमन

मानसून शब्द अरबी भाषा के मौसिम शब्द से बना है, जिसका अर्थ है मौसम। जून के पहले सप्ताह में मानसून केरल के तट से भारत में प्रवेश करता है। इसकी एक शाखा अरब सागर से उठकर पश्चिमी घाट पर बरसती है और दूसरी बंगाल की खाड़ी से पूर्वोत्तर और गंगा के मैदानों तक पहुँचती है। मेघालय के मासिनराम और चेरापूंजी संसार के सबसे अधिक वर्षा वाले स्थानों में गिने जाते हैं।

प्रकृति का सौंदर्य

बरसात में प्रकृति का रूप देखते ही बनता है। पेड़ों के पत्ते धुलकर चमकने लगते हैं, खेतों में हरी चादर बिछ जाती है और पहाड़ों से दूधिया झरने गिरते हैं। रात में जुगनू टिमटिमाते हैं और झींगुरों की आवाज़ गूँजती है। कभी-कभी आसमान में इंद्रधनुष निकल आता है, जिसे देखकर बच्चे खुशी से उछल पड़ते हैं। सावन में गाँव की लड़कियाँ पेड़ों पर झूला झूलती हैं और मल्हार तथा कजरी गाती हैं।

वर्षा ऋतु का महत्व

भारत की खेती का बड़ा हिस्सा आज भी वर्षा पर निर्भर है। धान, मक्का, बाजरा, कपास, सोयाबीन और दालें जैसी खरीफ़ फसलें इसी ऋतु में बोई जाती हैं। वर्षा से बाँधों में पानी भरता है, जिससे पीने का पानी और बिजली मिलती है। कुओं और हैंडपंपों का जलस्तर भी बढ़ता है। अगर मानसून कमज़ोर हो, तो सूखा पड़ता है और किसानों के साथ पूरे देश को कठिनाई झेलनी पड़ती है।

वर्षा ऋतु की हानियाँ

अति हर चीज़ की बुरी होती है। असम में ब्रह्मपुत्र और बिहार में कोसी नदी की बाढ़ से अक्सर भारी नुकसान होता है। पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन होते हैं और सड़कें टूट जाती हैं। शहरों में जलभराव से यातायात रुक जाता है। जगह-जगह जमा पानी में मच्छर पनपते हैं और गंदे पानी से पेट के रोग फैलते हैं। आकाशीय बिजली गिरने की घटनाएँ भी इस मौसम में बढ़ जाती हैं।

बरसात में सावधानियाँ

इस मौसम में थोड़ी-सी सावधानी हमें कई परेशानियों से बचा सकती है। पीने का पानी उबालकर या साफ़ करके ही पीना चाहिए और खुले में बिकने वाले कटे फल या चाट से बचना चाहिए। घर के आसपास कूलर, गमलों और टायरों में पानी जमा न होने दें। सोते समय मच्छरदानी लगाएँ। बिजली कड़कने पर पेड़ों के नीचे या खुले मैदान में खड़े न हों और बिजली के खंभों से दूर रहें। बाढ़ वाले रास्तों और उफनती नदियों के पास जाने का जोखिम कभी न लें।

उपसंहार

वर्षा ऋतु प्रकृति का अनमोल उपहार है। यह हमें सिखाती है कि जल ही जीवन है। हमें वर्षा के पानी को व्यर्थ बहने देने के बजाय तालाबों और टैंकों में सहेजना चाहिए, अधिक से अधिक पेड़ लगाने चाहिए और सफ़ाई का ध्यान रखना चाहिए। यदि हम प्रकृति का सम्मान करेंगे, तो वर्षा ऋतु हर वर्ष खुशहाली लेकर आएगी।

Varsha Ritu Par Bhashan: वर्षा ऋतु पर भाषण (2 मिनट)

कक्षा 4 से 8239 शब्दलगभग 2 मिनट

आदरणीय प्रधानाचार्य जी, सभी शिक्षकगण और मेरे प्यारे साथियों,

आज मैं आपके सामने उस ऋतु के बारे में बोलने आया हूँ, जिसका इंतज़ार किसान से लेकर बच्चों तक सभी करते हैं। जी हाँ, मैं बात कर रहा हूँ वर्षा ऋतु की। क्या आपको याद है कि पहली बारिश में भीगी मिट्टी की खुशबू कैसी होती है? वह खुशबू मानसून का स्वागत संदेश है।

दोस्तों, भारत में बारिश प्रायः जून से सितंबर तक होती है। समुद्र से उठे बादल हमारी प्यासी धरती पर बरसते हैं। तालाब भर जाते हैं, पेड़ हरे हो जाते हैं और खेतों में जीवन लौट आता है।

पर क्या बारिश केवल कागज़ की नाव और पकौड़ों के लिए है? नहीं। यह हमारे किसानों की जीवन-रेखा है। समय पर वर्षा हो, तो धान और मक्का की अच्छी फसल होती है और हमारी थाली भरी रहती है। यही वर्षा हमारे कुओं, नदियों और बाँधों को भरती है।

लेकिन साथियों, इस ऋतु में सावधानी भी ज़रूरी है। कूलर, गमलों और पुराने टायरों में जमा पानी में मच्छर अंडे देते हैं। आइए, हर हफ़्ते ऐसा पानी खाली करें, उबला या साफ़ पानी पिएँ और बाढ़ वाले रास्तों से दूर रहें।

और सबसे बड़ी बात, आइए बारिश की हर बूँद को सहेजें। हमारा विद्यालय छत का पानी इकट्ठा कर सकता है और हर परिवार इस मौसम में कम से कम एक पेड़ लगा सकता है।

याद रखिए, बादल तो हर साल आएँगे, पर उनका पानी बचाना हमारे हाथ में है।

धन्यवाद।

Basant Ritu Par Nibandh 150 Words: वसंत ऋतु पर निबंध

कक्षा 4 से 7153 शब्द

वसंत ऋतु को ऋतुराज, यानी सभी ऋतुओं का राजा कहा जाता है। सर्दी के जाने और गर्मी के आने के बीच, फरवरी-मार्च के आसपास यह ऋतु आती है। इन दिनों न अधिक ठंड होती है, न अधिक गर्मी, और मंद-मंद हवा मन को प्रसन्न कर देती है।

वसंत में प्रकृति नए वस्त्र पहन लेती है। पेड़ों से पुराने पत्ते झड़ जाते हैं और नई कोमल पत्तियाँ आ जाती हैं। सरसों के खेत पीले फूलों से भर जाते हैं, आम के पेड़ों पर बौर आ जाता है और कोयल मीठे स्वर में कूकती है। बाग़ों में गुलाब, गेंदा और अनेक रंग-बिरंगे फूल खिलते हैं, जिन पर भौंरे और तितलियाँ मँडराते हैं।

इसी ऋतु में बसंत पंचमी और होली जैसे त्योहार आते हैं। लोग पीले कपड़े पहनते हैं और कई जगह पतंगें उड़ाई जाती हैं। खेतों में गेहूँ की बालियाँ पकने लगती हैं। वसंत ऋतु हमारे जीवन में नई उमंग और आशा भर देती है।

Grishm Ritu Par Nibandh: ग्रीष्म ऋतु पर निबंध 150 शब्द

कक्षा 4 से 7162 शब्द

वसंत के बाद ग्रीष्म ऋतु आती है। मार्च से जून तक गर्मी रहती है और मई-जून में यह अपने चरम पर होती है। सूरज आग बरसाता है, धरती तवे की तरह तपने लगती है और दोपहर में सड़कें सूनी हो जाती हैं। उत्तर भारत में गरम और सूखी हवाएँ चलती हैं, जिन्हें लू कहते हैं।

गर्मी में लोग सूती और हल्के रंग के कपड़े पहनते हैं। घरों में पंखे और कूलर दिन-रात चलते हैं। प्यास बुझाने के लिए हम नींबू पानी, छाछ, लस्सी, आम पना और बेल का शरबत पीते हैं। आम, तरबूज़, खरबूज़ा, लीची और ककड़ी इस मौसम के खास फल हैं। विद्यालयों में गर्मी की लंबी छुट्टियाँ होती हैं, जिनमें बच्चे नानी के घर या पहाड़ों पर घूमने जाते हैं।

तेज़ गर्मी से लू लगने का डर रहता है और तालाब सूख जाते हैं। हमें खूब पानी पीना चाहिए और पक्षियों के लिए छत पर पानी रखना चाहिए। ग्रीष्म ऋतु कठिन है, पर यही वर्षा का रास्ता तैयार करती है।

Sheet Ritu Par Nibandh: शीत ऋतु पर निबंध 150 शब्द

कक्षा 4 से 7147 शब्द

शीत ऋतु यानी सर्दी का मौसम दिसंबर से फरवरी तक रहता है। दिसंबर और जनवरी में सबसे अधिक ठंड पड़ती है। सुबह घना कोहरा छाया रहता है, ओस की बूँदें घास पर मोतियों-सी चमकती हैं और दिन छोटे हो जाते हैं। कश्मीर और हिमाचल के पहाड़ बर्फ़ से ढक जाते हैं।

सर्दी में लोग स्वेटर, शॉल, टोपी और मफ़लर पहनते हैं। शाम को परिवार अलाव के पास बैठकर बातें करते हैं। यह खाने-पीने का भी मौसम है। गाजर का हलवा, मक्के की रोटी के साथ सरसों का साग, तिल-गुड़ के लड्डू और मूँगफली सबको भाते हैं। बाज़ार गोभी, मटर, गाजर और संतरों से भर जाते हैं। लोहड़ी, मकर संक्रांति और पोंगल जैसे फसल-उत्सव इसी समय मनाए जाते हैं।

पर गरीबों के लिए सर्दी कठिन होती है। कोहरे से सड़क दुर्घटनाएँ होती हैं और रेलगाड़ियाँ देर से चलती हैं। हमें ज़रूरतमंदों को गरम कपड़े और कंबल देने चाहिए।

10 Lines on Winter Vacation in Hindi: शीतकालीन अवकाश पर 10 पंक्तियाँ

10 पंक्तियाँकक्षा 2 से 597 शब्द

  1. हमारे विद्यालय में दिसंबर के अंत में सर्दी की छुट्टियाँ होती हैं।
  2. इन छुट्टियों को शीतकालीन अवकाश कहा जाता है।
  3. छुट्टियों में हमें ठंडी सुबह जल्दी उठकर स्कूल नहीं जाना पड़ता।
  4. मैं रज़ाई में बैठकर कहानियों की किताबें पढ़ता हूँ।
  5. दोपहर में पूरा परिवार छत पर धूप सेंकता है।
  6. माँ हमारे लिए गरम सूप और गाजर का हलवा बनाती हैं।
  7. छुट्टियों में हम दादा-दादी से मिलने गाँव जाते हैं।
  8. वहाँ हम अलाव के पास बैठकर मूँगफली खाते हैं।
  9. मैं छुट्टियों का गृहकार्य भी समय पर पूरा करता हूँ।
  10. शीतकालीन अवकाश मुझे आराम और खुशी दोनों देता है।

Sharad Ritu Par Nibandh: शरद ऋतु पर अनुच्छेद

कक्षा 5 से 8113 शब्द

वर्षा ऋतु के बाद शरद ऋतु आती है। पंचांग के अनुसार आश्विन और कार्तिक इसके महीने हैं, जो सितंबर से नवंबर के बीच पड़ते हैं। बारिश थम जाती है, आसमान साफ़ और नीला हो जाता है और हवा में हल्की ठंडक घुलने लगती है। रात को चाँदनी बहुत उजली दिखाई देती है। शरद पूर्णिमा की रात कई घरों में खीर बनाकर खुले आसमान के नीचे रखी जाती है। तालाबों में कमल खिलते हैं और खेतों में धान की फसल पककर सुनहरी हो जाती है। दशहरा और दीपावली जैसे बड़े त्योहार भी इसी ऋतु में आते हैं। न अधिक गर्मी होती है, न अधिक सर्दी, इसलिए शरद ऋतु को बहुत सुहावना माना जाता है।

Varsha Ritu Par Nibandh Kaise Likhen: निबंध लिखने के टिप्स

  • निबंध की शुरुआत किसी दृश्य से करें, जैसे पहली बारिश की खुशबू या बादलों की गरज, सीधे परिभाषा से नहीं।
  • मुख्य तथ्य ज़रूर लिखें: मानसून जून के आरंभ में केरल पहुँचता है और बारिश प्रायः सितंबर तक चलती है।
  • प्रकृति, लोगों और खेती तीनों का वर्णन करें: हरियाली, मोर और मेंढक, झूले और पकौड़े, धान की रोपाई।
  • वर्षा ऋतु के लाभ के साथ हानियाँ भी लिखें, जैसे बाढ़, जलभराव और मच्छरों से फैलने वाले रोग।
  • 300 या 500 शब्दों के निबंध में प्रस्तावना, मानसून का आगमन, महत्व, हानियाँ और उपसंहार जैसे शीर्षक लगाएँ।
  • बसंत, ग्रीष्म या शीत ऋतु पर लिखते समय उस ऋतु के महीने, मौसम, फल-सब्ज़ियाँ, कपड़े और त्योहार अवश्य बताएँ।
  • अंत में कोई संदेश दें, जैसे वर्षा जल संचयन या पेड़ लगाना, पहला अनुच्छेद दोहराएँ नहीं।

यही विषय अंग्रेज़ी में चाहिए? पढ़ें: Rainy Season Essay for Students (with Summer, Winter and Spring Essays)

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

वर्षा ऋतु कब आती है?

भारतीय पंचांग में सावन और भादों वर्षा ऋतु के महीने माने जाते हैं। मौसम के हिसाब से मानसून जून के पहले सप्ताह में केरल पहुँचता है और सितंबर के अंत तक लौटने लगता है।

भारत में कितनी ऋतुएँ होती हैं?

भारतीय परंपरा में छह ऋतुएँ मानी जाती हैं: वसंत, ग्रीष्म, वर्षा, शरद, हेमंत और शिशिर। सामान्य बोलचाल में हम मुख्य रूप से गर्मी, बरसात और सर्दी की बात करते हैं।

ऋतुराज किसे कहा जाता है?

वसंत ऋतु को ऋतुराज यानी ऋतुओं का राजा कहा जाता है, क्योंकि इस समय मौसम सुहावना होता है और चारों ओर फूल खिलते हैं। कई हिंदी निबंधों में वर्षा ऋतु को ऋतुओं की रानी कहा गया है।

वर्षा जल संचयन क्या है?

बारिश के पानी को बहकर बर्बाद होने देने के बजाय छत, टैंक, गड्ढों या तालाबों में इकट्ठा करना वर्षा जल संचयन कहलाता है। इससे भूजल का स्तर बढ़ता है और गर्मी में पानी की कमी कम होती है।

वर्षा ऋतु में कौन-सी फसलें बोई जाती हैं?

वर्षा ऋतु में बोई जाने वाली फसलें खरीफ़ फसलें कहलाती हैं। इनमें धान, मक्का, बाजरा, कपास, सोयाबीन, मूँगफली और कई दालें शामिल हैं।

हर निबंध और भाषण हमारी टीम ने लिखा और जाँचा है। कोई गलती दिखे तो हमें बताएँ। हम कैसे लिखते हैं।

More essays and speeches