Mahatma Gandhi Essay in Hindi: महात्मा गांधी पर निबंध (10 पंक्तियाँ और निबंध)
Mahatma Gandhi essay in Hindi (महात्मा गांधी पर निबंध) ढूँढ रहे छोटे और बड़े, सभी विद्यार्थी यहाँ राष्ट्रपिता के जीवन, आंदोलनों और विचारों पर सामग्री पा सकते हैं। पहली कक्षा से दसवीं तक के लिए बापू पर 10 पंक्तियों के दो सेट, 100 से 500 शब्दों तक के पाँच निबंध और गांधी जयंती की सभा में बोलने लायक दो मिनट का एक भाषण यहाँ दिया गया है।
गांधी जी पर लिखते समय तिथियाँ सबसे ज़्यादा मायने रखती हैं, इसलिए जन्म, दक्षिण अफ्रीका, दांडी यात्रा और भारत छोड़ो आंदोलन के वर्ष ठीक से याद कर लें। फिर निबंध की बातें अपनी भाषा में दोहराएँ। इसी विषय पर अंग्रेज़ी सामग्री हमारे Mahatma Gandhi Essay पेज पर मिलेगी।
10 Lines on Mahatma Gandhi in Hindi: गांधी जी पर 10 पंक्तियाँ
- महात्मा गांधी हमारे देश के राष्ट्रपिता कहलाते हैं।
- उनका जन्म 2 अक्टूबर 1869 को गुजरात के पोरबंदर में हुआ था।
- उनका पूरा नाम मोहनदास करमचंद गांधी था।
- बच्चे और बड़े सब उन्हें प्यार से बापू कहते हैं।
- गांधी जी हमेशा सच बोलते थे और किसी को दुख नहीं देते थे।
- वे चरखे पर सूत कातते थे और खादी के कपड़े पहनते थे।
- उन्होंने अंग्रेज़ों से आज़ादी की लड़ाई में देश की अगुवाई की।
- उन्होंने यह लड़ाई बिना हिंसा के, शांति के रास्ते से लड़ी।
- 15 अगस्त 1947 को हमारा देश आज़ाद हो गया।
- हर साल 2 अक्टूबर को हम गांधी जयंती मनाते हैं।

Mahatma Gandhi Essay in Hindi 10 Lines: कक्षा 5 के लिए गांधी जी पर 10 पंक्तियाँ
- गांधी जी के पिता करमचंद गांधी पोरबंदर रियासत के दीवान थे और माता का नाम पुतलीबाई था।
- तेरह वर्ष की आयु में उनका विवाह कस्तूरबा से हुआ, जिन्हें लोग आदर से बा कहते थे।
- वे कानून की पढ़ाई के लिए इंग्लैंड गए और बैरिस्टर बनकर लौटे।
- दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद के कारण उन्हें रेल के प्रथम श्रेणी के डिब्बे से बाहर निकाल दिया गया।
- इसी अपमान के बाद उन्होंने अन्याय के विरुद्ध सत्याग्रह का रास्ता अपनाया।
- सन् 1915 में वे भारत लौटे और कुछ ही वर्षों में स्वतंत्रता आंदोलन के सबसे बड़े नेता बन गए।
- 1917 में उन्होंने बिहार के चंपारण में नील की खेती करने वाले किसानों का साथ दिया।
- 1930 में नमक कानून तोड़ने के लिए उन्होंने साबरमती आश्रम से दांडी तक पैदल यात्रा की।
- 1942 में उन्होंने भारत छोड़ो आंदोलन चलाया और करो या मरो का नारा दिया।
- 30 जनवरी 1948 को उनकी हत्या कर दी गई, इसलिए यह दिन शहीद दिवस के रूप में याद किया जाता है।
Mahatma Gandhi Ka Nibandh: महात्मा गांधी पर निबंध 100 शब्द
सफ़ेद धोती, गोल चश्मा और हाथ में लाठी, यह छवि देखते ही हर भारतीय पहचान लेता है कि ये महात्मा गांधी हैं। उनका जन्म 2 अक्टूबर 1869 को पोरबंदर में हुआ था। वे वकील थे, पर उन्होंने अपना पूरा जीवन देश की सेवा में लगा दिया।
गांधी जी ने सत्य और अहिंसा के बल पर अंग्रेज़ों से आज़ादी की लड़ाई लड़ी। वे सादा भोजन करते थे और खादी पहनते थे। उन्होंने लोगों को साफ़-सफ़ाई और आपसी प्रेम का पाठ पढ़ाया। अनेक देशभक्तों के साथ उनके प्रयासों से 1947 में भारत स्वतंत्र हुआ। इसीलिए हम उन्हें राष्ट्रपिता और बापू कहते हैं।
Mahatma Gandhi Par Nibandh: महात्मा गांधी पर निबंध 150 शब्द
हमारे देश को आज़ादी दिलाने वाले नेताओं में महात्मा गांधी का नाम सबसे पहले लिया जाता है। उनका पूरा नाम मोहनदास करमचंद गांधी था। महात्मा का अर्थ है महान आत्मा। लोग उन्हें प्यार से बापू कहते हैं।
गांधी जी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 को गुजरात के पोरबंदर नगर में हुआ। उन्होंने लंदन से कानून की पढ़ाई की और फिर काम के सिलसिले में दक्षिण अफ्रीका गए। वहाँ भारतीयों के साथ बहुत बुरा व्यवहार होता था। गांधी जी ने इसके विरुद्ध शांति से आवाज़ उठाई।
1915 में भारत लौटकर उन्होंने असहयोग आंदोलन, नमक सत्याग्रह और भारत छोड़ो आंदोलन जैसे बड़े आंदोलन चलाए। उन्होंने कभी हथियार नहीं उठाया। उपवास, पदयात्रा और अन्यायपूर्ण कानूनों को न मानना ही उनके हथियार थे।
30 जनवरी 1948 को उनका निधन हुआ। आज भी उनकी जयंती पूरे देश में श्रद्धा से मनाई जाती है।
Mahatma Gandhi Essay in Hindi 200 Words: गांधी जी पर निबंध 200 शब्द
भारत के स्वतंत्रता संग्राम में अनगिनत वीरों ने भाग लिया, लेकिन राष्ट्रपिता केवल एक को कहा गया। वे थे महात्मा गांधी, जिन्होंने करोड़ों साधारण लोगों को बिना डरे और बिना किसी को चोट पहुँचाए अपने अधिकार माँगना सिखाया।
गांधी जी के विचार दक्षिण अफ्रीका में बने, जहाँ वे लगभग इक्कीस वर्ष रहे। वहाँ उन्होंने देखा कि भारतीयों को अपमानित किया जाता है और उन्हें बराबरी के अधिकार नहीं मिलते। उन्होंने शांतिपूर्ण विरोध का नया तरीका अपनाया और उसे सत्याग्रह नाम दिया।
1915 में भारत लौटने के बाद उन्होंने 1917 में चंपारण के किसानों की समस्या उठाई। फिर 1920 में असहयोग आंदोलन, 1930 में दांडी यात्रा और 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन चलाया। लोगों ने विदेशी कपड़ों की होली जलाई, अंग्रेज़ी स्कूल और अदालतें छोड़ीं और हँसते हुए जेल गए। गांधी जी स्वयं कई वर्ष जेल में रहे।
वे केवल राजनीतिक आज़ादी ही नहीं, बल्कि एक न्यायपूर्ण समाज भी चाहते थे। उन्होंने छुआछूत का विरोध किया, गाँव के उद्योगों को बढ़ावा दिया और सभी धर्मों के लोगों में एकता पर ज़ोर दिया। 15 अगस्त 1947 को देश आज़ाद हुआ और कुछ ही महीनों बाद 30 जनवरी 1948 को दिल्ली में उनकी हत्या कर दी गई।
Mahatma Gandhi Essay in Hindi 300 Words: महात्मा गांधी पर निबंध 300 शब्द
कुछ नेता सेना के बल पर जीतते हैं, पर महात्मा गांधी ने एक चरखे, एक लाठी और सत्य पर अटूट विश्वास के सहारे देश को आज़ादी की राह दिखाई। उनका जन्म 2 अक्टूबर 1869 को पोरबंदर में हुआ। बचपन में वे बहुत शर्मीले थे और पढ़ाई में साधारण थे, पर झूठ बोलना उन्हें बिल्कुल पसंद नहीं था। तेरह वर्ष की उम्र में उनका विवाह कस्तूरबा से हुआ।
1888 में वे कानून पढ़ने लंदन गए। कुछ वर्षों बाद एक मुकदमे के सिलसिले में उन्हें दक्षिण अफ्रीका जाना पड़ा। वहाँ पीटरमैरिट्ज़बर्ग स्टेशन पर उन्हें केवल इसलिए ट्रेन से उतार दिया गया क्योंकि वे गोरे नहीं थे। उन्होंने लौटने के बजाय वहीं रहकर अन्याय से लड़ने का निश्चय किया। वहाँ उन्होंने इंडियन ओपिनियन नाम का अख़बार निकाला और फ़ीनिक्स आश्रम तथा टॉल्स्टॉय फ़ार्म की स्थापना की।
1915 में भारत लौटकर उन्होंने देश भर में घूमकर लोगों का जीवन नज़दीक से देखा। चंपारण और खेड़ा में वे गरीब किसानों के साथ खड़े हुए। 1920 के असहयोग आंदोलन और 1930 के नमक सत्याग्रह ने अंग्रेज़ी शासन की नींव हिला दी। 1942 में उनके करो या मरो के आह्वान से भारत छोड़ो आंदोलन शुरू हुआ।
उनका जीवन ही उनका संदेश था। वे साबरमती और बाद में सेवाग्राम आश्रम में रहे, खादी पहनते थे, शाकाहारी सादा भोजन करते थे और सफ़ाई सहित अपना हर काम खुद करते थे। उनकी आत्मकथा सत्य के प्रयोग आज भी दुनिया भर में पढ़ी जाती है।
आज 2 अक्टूबर भारत में गांधी जयंती के रूप में और पूरी दुनिया में अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस के रूप में मनाया जाता है। उनके विचारों ने अनेक देशों में बराबरी के लिए लड़ने वालों को प्रेरणा दी।
Mahatma Gandhi Par Nibandh in Hindi: महात्मा गांधी पर निबंध 500 शब्द
प्रस्तावना
30 जनवरी 1948 की शाम जब गांधी जी के निधन का समाचार फैला, तो पूरा देश ऐसे रोया जैसे हर घर का कोई बुज़ुर्ग चला गया हो। गांधी जी न राजा थे, न सेनापति और न ही धनवान। वे एक वकील थे जिन्होंने देश के सबसे गरीब व्यक्ति जैसा जीवन चुना और इसी सादगी के कारण वे स्वतंत्रता आंदोलन की आत्मा बन गए।
प्रारंभिक जीवन और शिक्षा
मोहनदास का जन्म 2 अक्टूबर 1869 को गुजरात के समुद्र तट पर बसे पोरबंदर में हुआ। उनके पिता करमचंद गांधी उस छोटी रियासत के दीवान थे। माता पुतलीबाई से उन्होंने व्रत, प्रार्थना और संयम का महत्व सीखा। राजकोट में स्कूल की पढ़ाई के दौरान वे संकोची स्वभाव के विद्यार्थी थे। अठारह वर्ष की आयु में वे इंग्लैंड गए और 1891 में बैरिस्टर बनकर लौटे।
दक्षिण अफ्रीका का संघर्ष
बंबई में वकालत ठीक से नहीं चली, इसलिए 1893 में वे एक भारतीय व्यापारी फ़र्म का मुकदमा लड़ने दक्षिण अफ्रीका गए। वहाँ रंगभेद के कारण हुए अपमान ने उनके भीतर छिपे योद्धा को जगा दिया। उन्होंने वहाँ बसे भारतीयों को एकजुट किया और उस कानून का विरोध किया जो भारतीयों को पंजीकरण कराने और प्रमाणपत्र साथ रखने के लिए मजबूर करता था। यहीं उन्होंने सत्याग्रह का तरीका विकसित किया, यानी अन्यायपूर्ण कानून को शांति से न मानना और उसकी सज़ा धैर्य से सहना।
स्वतंत्रता आंदोलन में भूमिका
1915 में भारत लौटकर गांधी जी ने रेल के तीसरे दर्जे में यात्रा करते हुए देश को करीब से समझा। 1917 में चंपारण में उन्होंने उन किसानों की आवाज़ उठाई जिन्हें अंग्रेज़ बागान मालिक ज़बरदस्ती नील उगाने पर मजबूर करते थे।
1920 में उन्होंने असहयोग आंदोलन शुरू किया और लोगों से विदेशी कपड़े, सरकारी उपाधियाँ और अंग्रेज़ी स्कूल छोड़ने को कहा। 1922 में चौरी चौरा में भीड़ हिंसक हो गई तो उन्होंने पूरा आंदोलन वापस ले लिया, क्योंकि वे ख़ून-ख़राबे से मिली आज़ादी नहीं चाहते थे। 1930 में उन्होंने साबरमती से दांडी तक 24 दिन की पदयात्रा करके मुट्ठी भर नमक उठाया और नमक कानून तोड़ा। अगस्त 1942 में उन्होंने अंग्रेज़ों से भारत छोड़ने को कहा। वे कई बार जेल गए, पर अहिंसा का मार्ग कभी नहीं छोड़ा।
गांधी जी के सिद्धांत
गांधी जी के लिए सत्य और अहिंसा केवल नारे नहीं, रोज़ की आदत थे। वे हर दिन चरखा चलाते थे और उन्होंने खादी को आत्मनिर्भरता का प्रतीक बना दिया। उन्होंने छुआछूत को मिटाने के लिए जीवन भर काम किया और हिंदू-मुस्लिम एकता पर ज़ोर दिया। उनका मानना था कि असली भारत गाँवों में बसता है। अपने आश्रम में वे शौचालय भी खुद साफ़ करते थे, ताकि लोग समझें कि कोई काम छोटा नहीं होता।
उपसंहार
15 अगस्त 1947 को देश आज़ाद हुआ, पर उस दिन गांधी जी उत्सव मनाने के बजाय कलकत्ता में सांप्रदायिक शांति के लिए काम कर रहे थे। दिल्ली में राजघाट पर बनी उनकी समाधि पर आज दुनिया भर से लोग श्रद्धांजलि देने आते हैं। गांधी जी ने सिद्ध किया कि सत्य पर अडिग एक व्यक्ति भी बड़े से बड़े साम्राज्य को झुका सकता है। यदि हम ईमानदार रहें, अपने आसपास सफ़ाई रखें और हर इंसान का सम्मान करें, तो यही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
Mahatma Gandhi Speech in Hindi: महात्मा गांधी पर भाषण (2 मिनट)
आदरणीय प्रधानाचार्य जी, सभी शिक्षकगण और मेरे प्यारे साथियों,
आज मैं आपके सामने एक ऐसे व्यक्ति के बारे में बोलने आया हूँ जिसके पास न सेना थी, न धन था और न कोई सरकारी पद, फिर भी उसने शक्तिशाली अंग्रेज़ी साम्राज्य को झुकने पर मजबूर कर दिया। क्या आप जानते हैं वे कौन थे? वे थे हमारे प्यारे बापू, महात्मा गांधी।
गांधी जी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 को पोरबंदर में हुआ था। दक्षिण अफ्रीका में उन्हें केवल रंग के कारण अपमानित किया गया। क्या उन्होंने बदले में हाथ उठाया? नहीं। उन्होंने सत्य और अहिंसा से अन्याय का सामना करने का फ़ैसला किया और इस तरीके को सत्याग्रह कहा।
भारत लौटकर वे किसानों, मज़दूरों और आम लोगों की आवाज़ बन गए। उन्होंने सैकड़ों किलोमीटर पैदल चलकर दांडी के समुद्र तट पर मुट्ठी भर नमक उठाया और नमक कानून तोड़ा, क्योंकि वे मानते थे कि नमक पर हर गरीब का हक है। उन्होंने हमें खादी पहनने और अपनी चीज़ें खुद बनाने की सीख दी। उन्होंने अंग्रेज़ों से कहा, भारत छोड़ो, और भारतीयों से कहा, निडर बनो।
साथियों, गांधी जी केवल आज़ादी ही नहीं चाहते थे। वे एक साफ़-सुथरा भारत चाहते थे, जहाँ छुआछूत न हो और हर धर्म के लोग भाई-बहन की तरह रहें।
तो हम विद्यार्थी उनसे क्या सीख सकते हैं? हम कठिन समय में भी सच बोल सकते हैं। हम अपनी कक्षा और गली को साफ़ रख सकते हैं। हम झगड़े को मुक्कों से नहीं, बातचीत से सुलझा सकते हैं। हम हर व्यक्ति का सम्मान कर सकते हैं, चाहे वह अमीर हो या गरीब।
बापू हमारे लिए कोई महल या खज़ाना छोड़कर नहीं गए। वे हमें उससे कहीं बड़ी चीज़ दे गए: अच्छा बनने का साहस।
धन्यवाद।
Gandhi Ji Par Nibandh Kaise Likhen: महात्मा गांधी पर निबंध लिखने के टिप्स
- शुरुआत किसी चित्र या प्रश्न से करें, जैसे लाठी लिए दांडी की ओर बढ़ते दुबले-पतले बापू की छवि। केवल नाम और जन्मतिथि से शुरू न करें।
- मुख्य तिथियाँ सही लिखें: जन्म 2 अक्टूबर 1869, भारत वापसी 1915, दांडी यात्रा 1930, भारत छोड़ो आंदोलन 1942 और निधन 30 जनवरी 1948।
- सत्याग्रह और अहिंसा का अर्थ सरल शब्दों में समझाएँ: सत्य पर डटे रहना और किसी को चोट न पहुँचाना।
- 300 या 500 शब्दों के निबंध में जीवन को क्रम से लिखें: बचपन, दक्षिण अफ्रीका, स्वतंत्रता संग्राम और उनके सिद्धांत।
- खादी, चरखा, स्वदेशी, आश्रम, बापू और राष्ट्रपिता जैसे शब्दों का प्रयोग करें, इनसे निबंध प्रभावशाली बनता है।
- अंत में बताएँ कि आज आप गांधी जी से क्या सीखते हैं, जैसे ईमानदारी, सफ़ाई या सबका सम्मान।
यही विषय अंग्रेज़ी में चाहिए? पढ़ें: Mahatma Gandhi Essay in English (10 Lines, Short and Long Essays)
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
महात्मा गांधी को राष्ट्रपिता क्यों कहा जाता है?
गांधी जी ने लगभग तीन दशक तक स्वतंत्रता आंदोलन का नेतृत्व किया और हर क्षेत्र, भाषा और धर्म के लोगों को एक साथ जोड़ा। उन्होंने देश को एक अभिभावक की तरह आज़ादी की राह दिखाई, इसलिए उन्हें राष्ट्रपिता और बापू कहा जाता है।
गांधी जी का जन्म कब और कहाँ हुआ था?
महात्मा गांधी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 को गुजरात के पोरबंदर में हुआ था। उनके पिता करमचंद गांधी और माता पुतलीबाई थीं।
गांधी जी ने कौन-कौन से प्रमुख आंदोलन चलाए?
1917 का चंपारण सत्याग्रह, 1920 का असहयोग आंदोलन, 1930 का नमक सत्याग्रह या दांडी यात्रा और 1942 का भारत छोड़ो आंदोलन उनके प्रमुख आंदोलन थे। ये सभी अहिंसा पर आधारित थे।
कक्षा 2 या 3 के लिए गांधी जी पर 10 लाइन कैसे लिखें?
हर पंक्ति छोटी और सरल रखें। उनका पूरा नाम, जन्मस्थान, जन्मतिथि, खादी और चरखा, सत्य और अहिंसा और गांधी जयंती के बारे में लिखें। इस पेज पर दी गई पहली 10 पंक्तियाँ कक्षा 1 से 3 के लिए ही लिखी गई हैं।
2 अक्टूबर को क्या मनाया जाता है?
2 अक्टूबर गांधी जी का जन्मदिन है, जिसे भारत में गांधी जयंती के रूप में मनाया जाता है और इस दिन राष्ट्रीय अवकाश रहता है। संयुक्त राष्ट्र इस दिन को अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस के रूप में मनाता है।
हर निबंध और भाषण हमारी टीम ने लिखा और जाँचा है। कोई गलती दिखे तो हमें बताएँ। हम कैसे लिखते हैं।