Paryavaran Par Nibandh: पर्यावरण पर निबंध हिंदी में (10 पंक्तियाँ, निबंध और भाषण)
Paryavaran par nibandh (पर्यावरण पर निबंध) ढूँढ रहे विद्यार्थियों के लिए यहाँ हवा, पानी, जंगल और धरती की रक्षा से जुड़ी सामग्री कक्षा 1 से 10 के स्तर के अनुसार रखी गई है। यहाँ पर्यावरण पर 10 पंक्तियों के दो सेट, 100, 200, 300 और 500 शब्दों के निबंध, विश्व पर्यावरण दिवस पर अनुच्छेद, पर्यावरण दिवस पर भाषण और पृथ्वी दिवस पर छोटा भाषण मिलेगा।
जितने शब्दों का निबंध माँगा गया हो, वही हिस्सा चुनें। हर अनुच्छेद का मुख्य विचार हाशिये पर नोट करें, फिर उन्हीं बिंदुओं को अपने वाक्यों में जोड़कर लिखें। इसी विषय पर अंग्रेज़ी सामग्री के लिए Environment Essay पेज खोलें।
Paryavaran Par Nibandh 10 Lines: पर्यावरण पर 10 पंक्तियाँ
- हमारे चारों ओर की हवा, पानी, मिट्टी, पेड़ और जीव मिलकर पर्यावरण बनाते हैं।
- पेड़-पौधे हमें साँस लेने के लिए साफ़ हवा देते हैं।
- नदियाँ, तालाब और बारिश हमें पीने का पानी देते हैं।
- चिड़ियाँ, तितलियाँ और जानवर भी पर्यावरण का हिस्सा हैं।
- साफ़ पर्यावरण में रहने से हम स्वस्थ और ख़ुश रहते हैं।
- धुआँ, प्लास्टिक और कूड़ा हमारे पर्यावरण को गंदा करते हैं।
- हमें कूड़ा हमेशा कूड़ेदान में ही डालना चाहिए।
- कमरे से निकलते समय पंखा और बत्ती बंद कर देनी चाहिए।
- हर बच्चे को एक पौधा लगाकर रोज़ उसमें पानी देना चाहिए।
- आओ, हम सब मिलकर अपनी धरती को हरा-भरा बनाएँ।

Paryavaran Sanrakshan Par 10 Lines: पर्यावरण संरक्षण पर 10 पंक्तियाँ (कक्षा 5)
- पर्यावरण शब्द परि और आवरण से मिलकर बना है, जिसका अर्थ है हमारे चारों ओर का घेरा।
- इसमें सजीव चीज़ें जैसे पेड़-पौधे और जीव तथा निर्जीव चीज़ें जैसे हवा, पानी और मिट्टी शामिल हैं।
- जंगल हमें ऑक्सीजन, लकड़ी, फल और औषधियाँ देते हैं और वर्षा लाने में भी मदद करते हैं।
- गाड़ियों और कारखानों का धुआँ हवा को ज़हरीला बना रहा है।
- प्लास्टिक की थैलियाँ नालियाँ रोक देती हैं और गाय तथा मछलियों के पेट में पहुँचकर उन्हें नुकसान पहुँचाती हैं।
- पेड़ों की अंधाधुंध कटाई से मिट्टी का कटाव, बाढ़ और गर्मी बढ़ती है।
- पर्यावरण की रक्षा के लिए हर साल 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाता है।
- कपड़े का थैला, स्टील की बोतल और साइकिल अपनाकर हम प्रदूषण कम कर सकते हैं।
- घर में गीला और सूखा कचरा अलग रखने से उसका सही उपयोग हो पाता है।
- पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार का नहीं, हम सबका कर्तव्य है।
Paryavaran Nibandh: पर्यावरण पर निबंध 100 शब्द
सुबह की ठंडी हवा, आँगन में चहकती चिड़ियाँ, खेतों की हरियाली और नदी का बहता पानी, ये सब हमारे पर्यावरण का हिस्सा हैं। पर्यावरण से ही हमें भोजन, पानी और साँस लेने के लिए हवा मिलती है। इसके बिना जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती।
आजकल बढ़ते धुएँ, प्लास्टिक और कूड़े के कारण पर्यावरण गंदा हो रहा है। जंगल कटने से बहुत से पशु-पक्षी बेघर हो गए हैं।
हम छोटे-छोटे कामों से पर्यावरण बचा सकते हैं। पेड़ लगाएँ, पानी बचाएँ, कपड़े का थैला रखें और कूड़ा इधर-उधर न फेंकें। स्वच्छ पर्यावरण ही स्वस्थ जीवन की कुंजी है।
Paryavaran Par Nibandh 200 Words in Hindi: पर्यावरण पर निबंध 200 शब्द
हम जिस धरती पर रहते हैं, उसकी हवा, जल, भूमि, वनस्पति और जीव-जंतु मिलकर पर्यावरण का निर्माण करते हैं। ये सभी एक-दूसरे पर निर्भर हैं। पेड़ ऑक्सीजन देते हैं, बादल वर्षा करते हैं, वर्षा से नदियाँ भरती हैं और नदियों के पानी से खेतों में अनाज उगता है। यदि इस श्रृंखला की एक कड़ी भी टूट जाए तो पूरा संतुलन बिगड़ जाता है।
पिछले कुछ दशकों में मनुष्य ने अपनी सुविधा के लिए प्रकृति का बहुत दोहन किया है। शहर फैलते गए और जंगल सिकुड़ते गए। कारखानों और वाहनों के धुएँ से हवा दूषित हो गई। नदियों में गंदा पानी और कचरा बहाया जाने लगा। इसका परिणाम है बढ़ती गर्मी, अनियमित वर्षा, पानी की कमी और नई-नई बीमारियाँ।
पर्यावरण की रक्षा के लिए हर व्यक्ति को आगे आना होगा। हमें अधिक से अधिक पेड़ लगाने चाहिए और प्लास्टिक का प्रयोग बंद करना चाहिए। बिजली और पानी का सोच-समझकर उपयोग करना चाहिए। पास की दूरी के लिए पैदल चलना या साइकिल चलाना अच्छी आदत है। विद्यालयों में इको क्लब बनाकर बच्चे भी बड़ा योगदान दे सकते हैं।
प्रकृति ने हमें बहुत कुछ दिया है। अब उसकी देखभाल करना हमारी ज़िम्मेदारी है।
Paryavaran Sanrakshan Par Nibandh: पर्यावरण संरक्षण पर निबंध 300 शब्द
भारतीय संस्कृति में प्रकृति को सदा माँ के समान आदर दिया गया है। गाँवों में पीपल और बरगद के नीचे चौपाल लगती थी, आँगन में तुलसी का पौधा होता था और लोग नदियों तथा तालाबों को साफ़ रखना अपना कर्तव्य मानते थे। पर्यावरण संरक्षण का अर्थ है प्रकृति के इन्हीं साधनों को सुरक्षित रखना, ताकि आने वाली पीढ़ियाँ भी उनका लाभ उठा सकें।
आज पर्यावरण अनेक खतरों से घिरा है। सर्दियों में कई बड़े शहरों में धुएँ और धूल की परत छा जाती है, जिससे साँस लेना कठिन हो जाता है। कारखानों का रसायन मिला पानी और शहरों का गंदा पानी नदियों को दूषित कर रहा है। खेतों में रासायनिक खादों के अधिक प्रयोग से मिट्टी की उर्वरता घट रही है। जंगल कटने से बाघ, हाथी और अनेक पक्षियों के घर छिन रहे हैं।
हमारे देश में पर्यावरण बचाने के प्रेरक उदाहरण भी हैं। सन् 1970 के दशक में हिमालय के गाँवों में चिपको आंदोलन हुआ, जिसमें महिलाएँ पेड़ों से लिपट गईं ताकि उन्हें काटा न जा सके। राजस्थान के कई गाँवों में लोग आज भी वर्षा का पानी जमा करने के लिए पुराने तालाबों और कुंडों की देखभाल करते हैं।
पर्यावरण संरक्षण के लिए कुछ सरल उपाय अपनाए जा सकते हैं। कम उपयोग, दोबारा उपयोग और पुनर्चक्रण का नियम अपनाएँ। प्लास्टिक की जगह कपड़े और जूट के थैले प्रयोग करें। नल खुला न छोड़ें और बिजली के उपकरण ज़रूरत न होने पर बंद रखें। त्योहारों पर शोर वाले पटाखों से बचें। जन्मदिन पर एक पौधा लगाने की परंपरा शुरू करें।
पर्यावरण की रक्षा कोई एक दिन का काम नहीं है। यह हमारी रोज़ की आदतों से जुड़ा है। यदि हम प्रकृति की रक्षा करेंगे, तो प्रकृति हमारी रक्षा करेगी।
Paryavaran Par Nibandh Hindi Mein: पर्यावरण पर निबंध 500 शब्द
प्रस्तावना
धरती पर जीवन इसलिए संभव है क्योंकि यहाँ हवा, पानी, उपजाऊ मिट्टी और उचित तापमान है। ये सभी तत्व और इनके बीच रहने वाले पेड़-पौधे, पशु-पक्षी तथा मनुष्य मिलकर पर्यावरण बनाते हैं। मनुष्य इस विशाल परिवार का एक सदस्य है, उसका स्वामी नहीं। फिर भी पिछले दो सौ वर्षों में मनुष्य की गतिविधियों ने पर्यावरण को जितना बदला है, उतना पहले कभी नहीं बदला था।
पर्यावरण का अर्थ और महत्व
पर्यावरण शब्द परि और आवरण से बना है, अर्थात वह आवरण जो हमें चारों ओर से घेरे हुए है। इसके दो रूप हैं: प्राकृतिक पर्यावरण, जिसमें वायु, जल, भूमि, वन और वन्य जीव आते हैं, और मानव-निर्मित पर्यावरण, जिसमें घर, सड़कें, खेत और नगर शामिल हैं। स्वस्थ पर्यावरण हमें शुद्ध वायु, स्वच्छ जल, अन्न, ईंधन और औषधियाँ देता है। वन वर्षा को रोककर भूमिगत जल को भरते हैं और मिट्टी को बहने से बचाते हैं। जब पर्यावरण का कोई एक अंग बीमार होता है, तो उसका असर पूरे जीवन चक्र पर पड़ता है।
पर्यावरण प्रदूषण और प्राकृतिक आपदाएँ
आज वायु, जल, भूमि और ध्वनि, चारों प्रकार का प्रदूषण बढ़ रहा है। वाहनों और कारखानों का धुआँ, खेतों में जलाई जाने वाली पराली और खुले में जलता कचरा हवा को ज़हरीला बना रहे हैं। नदियों में सीवर का पानी गिर रहा है। प्लास्टिक के छोटे टुकड़े मिट्टी, पानी और हमारे भोजन तक पहुँच चुके हैं।
कोयला, पेट्रोल और डीज़ल जलाने से कार्बन डाइऑक्साइड जैसी गैसें बढ़ती हैं, जिससे धरती का तापमान बढ़ रहा है। इसे ग्लोबल वार्मिंग कहते हैं। इसके कारण हिमनद पिघल रहे हैं, लू के दिन बढ़ रहे हैं और कहीं सूखा तो कहीं बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाएँ अधिक दिखाई दे रही हैं। पहाड़ों पर अंधाधुंध निर्माण से भूस्खलन की घटनाएँ भी बढ़ी हैं।
पर्यावरण संरक्षण के उपाय
पर्यावरण की रक्षा के लिए भारत में कई कानून बनाए गए हैं, जैसे वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 और पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986। हमारे संविधान के अनुच्छेद 51क में प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा और सुधार को हर नागरिक का मूल कर्तव्य बताया गया है। देश में सौर और पवन ऊर्जा का उपयोग भी तेज़ी से बढ़ रहा है।
लेकिन कानून तभी सफल होते हैं जब नागरिक जागरूक हों। हमें बिजली और पानी बचाना चाहिए, कचरे को गीले और सूखे में अलग करना चाहिए और एक बार उपयोग होने वाले प्लास्टिक को ना कहना चाहिए। नीम, पीपल, बरगद और जामुन जैसे देसी पेड़ लगाने से छाया भी मिलती है और पक्षियों को आश्रय भी।
उपसंहार
धरती हमें अपने पूर्वजों से विरासत में मिली है और हमें इसे अपने बच्चों को सुरक्षित सौंपना है। यदि हम आज नहीं चेते, तो आने वाली पीढ़ियों को दूषित हवा, सूखी नदियाँ और उजड़े जंगल ही मिलेंगे। सादा जीवन और प्रकृति के प्रति सम्मान ही इस संकट का सबसे बड़ा उपाय है। आइए, हम सब पर्यावरण की रक्षा को केवल कर्तव्य नहीं, अपनी रोज़ की आदत बना लें।
Paryavaran Diwas Par Nibandh: विश्व पर्यावरण दिवस पर अनुच्छेद
हर साल 5 जून को पूरी दुनिया में विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र ने यह तिथि इसलिए चुनी क्योंकि 5 जून 1972 को स्टॉकहोम में मानव पर्यावरण पर उसका पहला बड़ा सम्मेलन शुरू हुआ था। तब से यह दिन पर्यावरण के प्रति जागरूकता का एक विश्वव्यापी अभियान बन गया है। हर वर्ष किसी एक समस्या को विषय के रूप में चुना जाता है, जैसे प्लास्टिक प्रदूषण या भूमि को बंजर होने से बचाना। इस दिन विद्यालयों में पौधारोपण, पोस्टर प्रतियोगिता, निबंध लेखन और प्रश्नोत्तरी होती है। बच्चे पर्यावरण बचाने की शपथ लेते हैं। सच तो यह है कि पर्यावरण दिवस हमें याद दिलाता है कि प्रकृति की देखभाल साल के हर दिन की जानी चाहिए।
Environment Day Speech in Hindi: पर्यावरण दिवस पर भाषण (2 मिनट)
आदरणीय प्रधानाचार्य जी, सभी शिक्षकगण और मेरे प्यारे साथियों,
आज मैं आपके सामने उस विषय पर बोलने आई हूँ, जो हमारी हर साँस से जुड़ा है। वह विषय है हमारा पर्यावरण।
साथियों, ज़रा सोचिए। अगर एक दिन सुबह उठकर हमें चिड़ियों की चहचहाहट की जगह सिर्फ़ गाड़ियों का शोर सुनाई दे, नल खोलें तो पानी न आए और खिड़की खोलें तो धुएँ से आँखें जलने लगें, तो कैसा लगेगा? दुख की बात है कि हमारे देश के कई हिस्सों में यह सब सच हो रहा है।
हमारी नदियों में मछलियों की जगह कचरा बह रहा है। हर साल गर्मी पिछले साल से ज़्यादा लगती है। बारिश कभी समय पर नहीं आती और कभी इतनी आती है कि बाढ़ आ जाती है। जो गौरैया कभी हर आँगन में फुदकती थी, वह अब कई शहरों में दिखाई ही नहीं देती।
इसका ज़िम्मेदार कौन है? कोई दूर बैठा व्यक्ति नहीं, बल्कि हम सब। प्लास्टिक की थैलियाँ, खुले छोड़े गए नल और खाली कमरों में चलते पंखे, ये सब हमारी ही लापरवाही के उदाहरण हैं।
लेकिन अच्छी बात यह है कि अगर हम समस्या का हिस्सा हैं, तो समाधान का हिस्सा भी बन सकते हैं। आइए, आज हम कुछ वादे करें। हम बाज़ार जाते समय कपड़े का थैला ले जाएँगे। बिना ज़रूरत बत्ती और पंखा नहीं चलाएँगे। हर जन्मदिन पर एक पौधा लगाएँगे और उसे बड़ा होने तक पानी देंगे। शोर और धुएँ वाले पटाखों की जगह दीयों और रंगोली से त्योहार मनाएँगे।
याद रखिए, धरती ने हज़ारों वर्षों तक हमारा ध्यान रखा है। अब हमारी बारी है कि हम धरती का ध्यान रखें।
धन्यवाद।
Earth Day Speech in Hindi: पृथ्वी दिवस पर छोटा भाषण (1 मिनट)
माननीय प्रधानाचार्य जी, आदरणीय अध्यापकगण और मेरे सभी दोस्तों को सुप्रभात।
हर साल 22 अप्रैल को दुनिया भर में पृथ्वी दिवस मनाया जाता है। इस दिन हम अपनी धरती को साफ़ और सुंदर रखने का वचन लेते हैं।
हमारी धरती हमें बहुत कुछ देती है। मीठे फल, रंग-बिरंगे फूल, ठंडी हवा और साफ़ पानी, सब इसी की देन हैं। यहाँ शेर, हाथी, मोर और छोटी-छोटी तितलियाँ भी रहती हैं। पर हम कभी-कभी धरती को दुख पहुँचाते हैं। हम सड़क पर कचरा फेंकते हैं, पानी बर्बाद करते हैं और पेड़ काटते हैं।
दोस्तों, हम छोटे हैं, पर बड़े काम कर सकते हैं। हम नल कसकर बंद करेंगे, बत्ती बुझाएँगे और कॉपी के दोनों ओर लिखेंगे। हम एक पौधा लगाएँगे और रोज़ उसे पानी देंगे।
क्या आप हरी-भरी धरती पर रहना चाहते हैं? तो आइए, मिलकर धरती को फिर से मुस्कुराना सिखाएँ।
धन्यवाद।
Paryavaran Par Nibandh Kaise Likhen: पर्यावरण पर निबंध लिखने के टिप्स
- निबंध की शुरुआत किसी दृश्य से करें, जैसे धुएँ से भरी सड़क या चिड़ियों से भरा पेड़, सीधे परिभाषा से नहीं।
- पर्यावरण का अर्थ समझाएँ: परि और आवरण, यानी हमारे चारों ओर का घेरा, जिसमें हवा, पानी, भूमि और जीव शामिल हैं।
- मुख्य समस्याएँ साफ़ लिखें: वायु और जल प्रदूषण, प्लास्टिक, वनों की कटाई और ग्लोबल वार्मिंग।
- भारत के उदाहरण जोड़ें, जैसे चिपको आंदोलन, विश्व पर्यावरण दिवस (5 जून) और विद्यालयों में पौधारोपण।
- 300 या 500 शब्दों के निबंध में प्रस्तावना, महत्व, समस्याएँ, संरक्षण के उपाय और उपसंहार जैसे शीर्षक लगाएँ।
- ऐसे उपाय लिखें जो विद्यार्थी स्वयं कर सकें: पानी और बिजली की बचत, कपड़े का थैला और पेड़ लगाना।
- अंत में कोई संकल्प या संदेश दें, पहला अनुच्छेद दोहराएँ नहीं।
यही विषय अंग्रेज़ी में चाहिए? पढ़ें: Environment Essay for Students (10 Lines, Short and Long Essays)
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
पर्यावरण किसे कहते हैं?
हवा, पानी, मिट्टी, धूप, पेड़-पौधे, पशु-पक्षी और मनुष्य, यानी वह सब जो हमें घेरे हुए है, मिलकर पर्यावरण कहलाता है। पर्यावरण शब्द परि और आवरण से बना है, जिसका अर्थ है चारों ओर का घेरा।
विश्व पर्यावरण दिवस कब मनाया जाता है?
विश्व पर्यावरण दिवस हर साल 5 जून को मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र ने यह तिथि 1972 में स्टॉकहोम में हुए मानव पर्यावरण सम्मेलन की याद में चुनी। इस दिन विद्यालयों में पौधारोपण और जागरूकता कार्यक्रम होते हैं।
पृथ्वी दिवस और पर्यावरण दिवस में क्या अंतर है?
पृथ्वी दिवस 22 अप्रैल को मनाया जाता है और इसकी शुरुआत 1970 में अमेरिका से हुई थी। विश्व पर्यावरण दिवस 5 जून को संयुक्त राष्ट्र की पहल पर मनाया जाता है। दोनों का उद्देश्य एक ही है, धरती और प्रकृति की रक्षा।
विद्यार्थी पर्यावरण संरक्षण में क्या योगदान दे सकते हैं?
विद्यार्थी पानी और बिजली बचा सकते हैं, प्लास्टिक की जगह कपड़े का थैला ले सकते हैं और घर में कचरा अलग-अलग रख सकते हैं। वे पौधे लगाकर उनकी देखभाल कर सकते हैं और परिवार को भी जागरूक कर सकते हैं।
पर्यावरण पर अंग्रेज़ी में निबंध कहाँ मिलेगा?
अंग्रेज़ी में पर्यावरण पर 10 पंक्तियाँ, निबंध, प्रकृति पर अनुच्छेद और भाषण के लिए हमारा Environment Essay पेज देखें। वहाँ की सारी सामग्री अलग से अंग्रेज़ी माध्यम के विद्यार्थियों के लिए लिखी गई है।
हर निबंध और भाषण हमारी टीम ने लिखा और जाँचा है। कोई गलती दिखे तो हमें बताएँ। हम कैसे लिखते हैं।