Pradushan Par Nibandh: प्रदूषण पर निबंध हिंदी में (पर्यावरण प्रदूषण)
Pradushan par nibandh (प्रदूषण पर निबंध) लिखना हो या उस पर मंच से बोलना हो, कक्षा 1 से 12 तक के विद्यार्थी यहाँ अपनी ज़रूरत की सामग्री पा सकते हैं। छोटे बच्चों और कक्षा 5 के लिए 10 पंक्तियों के दो सेट हैं, फिर 100, 150, 200, 300 और 500 शब्दों के निबंध, वायु और जल प्रदूषण पर अलग-अलग अनुच्छेद तथा 2 मिनट का भाषण है। लंबे निबंध में वायु, जल, मृदा और ध्वनि, चारों प्रकारों की चर्चा है।
परीक्षा से पहले अपनी शब्द-सीमा देखें और उसी लंबाई वाला निबंध पढ़ें। उसमें से कारण, प्रभाव और उपाय तीन अलग खानों में उतार लें, फिर बिना देखे अपने वाक्यों में लिखने का अभ्यास करें। अंग्रेज़ी माध्यम के विद्यार्थी Essay on Pollution वाला पेज भी देख सकते हैं।
Pradushan Par Nibandh 10 Lines: प्रदूषण पर 10 पंक्तियाँ
- हवा, पानी और मिट्टी का गंदा होना प्रदूषण कहलाता है।
- गाड़ियों और कारखानों का धुआँ हवा को गंदा करता है।
- गंदी हवा से खाँसी आती है और आँखों में जलन होती है।
- कुछ लोग नदियों और तालाबों में कूड़ा फेंक देते हैं।
- गंदे पानी में मछलियाँ और दूसरे जीव मर जाते हैं।
- तेज़ हॉर्न और लाउडस्पीकर से ध्वनि प्रदूषण होता है।
- प्लास्टिक की थैलियाँ मिट्टी को खराब कर देती हैं।
- हमें कूड़ा हमेशा कूड़ेदान में ही डालना चाहिए।
- हमें ज़्यादा से ज़्यादा पेड़ लगाने चाहिए।
- साफ़ धरती पर ही हम सब स्वस्थ और खुश रह सकते हैं।

Pollution Essay in Hindi 10 Lines: कक्षा 5 के लिए प्रदूषण पर 10 पंक्तियाँ
- जब हानिकारक पदार्थ हवा, पानी या मिट्टी में मिलकर उन्हें दूषित कर देते हैं, तो उसे प्रदूषण कहते हैं।
- प्रदूषण के चार मुख्य प्रकार हैं: वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण, मृदा प्रदूषण और ध्वनि प्रदूषण।
- वाहनों का धुआँ, कारखानों की चिमनियाँ और खुले में कूड़ा जलाना वायु प्रदूषण के बड़े कारण हैं।
- शहरों का गंदा नाला और कारखानों का रासायनिक कचरा नदियों के पानी को ज़हरीला बना देता है।
- खेतों में रासायनिक खाद और कीटनाशकों का अधिक प्रयोग मिट्टी की उर्वरता घटाता है।
- प्लास्टिक सैकड़ों वर्षों तक नहीं गलता और नालियों, खेतों तथा समुद्रों को भर देता है।
- लगातार शोर से सिरदर्द, तनाव, नींद की कमी और बहरापन हो सकता है।
- दूषित हवा से दमा और फेफड़ों के रोग बढ़ते हैं, विशेषकर बच्चों और बुज़ुर्गों में।
- सार्वजनिक वाहन, कपड़े का थैला और बिजली की बचत प्रदूषण कम करने के आसान तरीके हैं।
- यदि हर नागरिक अपनी ज़िम्मेदारी समझे तो हमारा देश फिर से स्वच्छ और हरा-भरा बन सकता है।
Pradushan Ka Nibandh: प्रदूषण पर निबंध 100 शब्द
सुबह स्कूल जाते समय सड़क पर काला धुआँ, कूड़े के ढेर और उड़ती पॉलिथीन दिखाई देती है। यही प्रदूषण है। जब हमारी हवा, पानी और मिट्टी गंदे हो जाते हैं, तो उसे प्रदूषण कहते हैं।
प्रदूषण से हम बीमार पड़ते हैं। गंदी हवा से साँस की तकलीफ़ होती है। गंदे पानी से हैजा और पीलिया जैसे रोग फैलते हैं। तेज़ शोर से पढ़ाई और नींद दोनों में बाधा आती है।
हम छोटे-छोटे कामों से प्रदूषण घटा सकते हैं। कूड़ा कूड़ेदान में डालें, पॉलिथीन की जगह कपड़े का थैला रखें और पेड़ लगाएँ। साफ़ आदतों से ही साफ़ धरती बनती है।
Pollution Essay in Hindi 150 Words: प्रदूषण पर निबंध 150 शब्द
प्रकृति ने हमें स्वच्छ हवा, मीठा पानी और उपजाऊ मिट्टी दी है, पर मनुष्य की लापरवाही ने इन तीनों को दूषित कर दिया है। हानिकारक पदार्थों के कारण पर्यावरण में होने वाले इस बिगाड़ को प्रदूषण कहते हैं।
प्रदूषण कई प्रकार का होता है। वाहनों और कारखानों के धुएँ से वायु प्रदूषण होता है। नालों का गंदा पानी और कचरा नदियों में जाने से जल प्रदूषण होता है। रासायनिक खाद और प्लास्टिक मिट्टी को दूषित करते हैं। हॉर्न, लाउडस्पीकर और मशीनों का शोर ध्वनि प्रदूषण फैलाता है।
इसके परिणाम बहुत गंभीर हैं। लोग दमा, पेट के रोग, त्वचा रोग और कम सुनाई देने जैसी समस्याओं से पीड़ित हो रहे हैं। पशु-पक्षियों का जीवन भी संकट में है।
प्रदूषण रोकने के लिए हमें पेड़ लगाने चाहिए, सार्वजनिक वाहनों का उपयोग करना चाहिए और गीला तथा सूखा कचरा अलग रखना चाहिए। जब करोड़ों लोग छोटे कदम उठाएँगे, तभी भारत स्वच्छ बनेगा।
Paryavaran Pradushan Par Nibandh 200 Word: पर्यावरण प्रदूषण पर निबंध
हवा, पानी, मिट्टी, पेड़-पौधे और जीव-जंतु, ये सब मिलकर हमारा पर्यावरण बनाते हैं। जब मनुष्य के कामों से इस पर्यावरण का संतुलन बिगड़ जाता है और वह जीवन के लिए हानिकारक बन जाता है, तो इसे पर्यावरण प्रदूषण कहते हैं।
पर्यावरण प्रदूषण के मुख्य कारण हैं: तेज़ी से बढ़ती जनसंख्या, कारखानों की बढ़ती संख्या, वाहनों का धुआँ, जंगलों की कटाई और प्लास्टिक का अंधाधुंध प्रयोग। गाँवों में भी अब खेतों में रसायनों का प्रयोग और पराली जलाना आम हो गया है।
इसका असर हर जगह दिखाई देता है। सर्दियों में कई शहरों पर धुंध और धुएँ की मोटी चादर छा जाती है, जिसे स्मॉग कहते हैं। नदियों का पानी पीने लायक नहीं रहा। धरती का तापमान बढ़ रहा है और मौसम का चक्र बिगड़ रहा है। लोग साँस, हृदय और पेट के रोगों से परेशान हैं।
पर्यावरण को बचाना केवल सरकार का काम नहीं है। हमें अधिक से अधिक पेड़ लगाने चाहिए, पानी और बिजली बचानी चाहिए, कचरे को अलग-अलग करना चाहिए और प्लास्टिक से दूर रहना चाहिए। विद्यालयों में भी बच्चे पौधे लगाकर और कचरा अलग करके अच्छी शुरुआत कर सकते हैं। स्वस्थ पर्यावरण ही स्वस्थ जीवन का आधार है।
Vayu Pradushan Par Nibandh: वायु प्रदूषण पर अनुच्छेद
भोजन के बिना हम कई दिन रह सकते हैं, पर हवा के बिना कुछ मिनट भी नहीं। फिर भी आज बहुत से शहरों की हवा साँस लेने लायक नहीं रही। वाहनों से निकलने वाली गैसें, कारखानों और बिजलीघरों का धुआँ, निर्माण कार्यों की धूल और कूड़े तथा पराली का जलना हवा में ज़हरीली गैसें और बारीक कण घोल देते हैं। इससे खाँसी, आँखों में जलन, दमा और फेफड़ों के रोग होते हैं। वायु प्रदूषण कम करने के लिए हमें पैदल चलना, साइकिल चलाना, गाड़ियाँ साझा करना और पेड़ लगाना चाहिए।
Jal Pradushan Par Nibandh: जल प्रदूषण पर अनुच्छेद
भारत में नदियों को जीवनदायिनी माना जाता है, पर आज कई नदियाँ गंदे नालों जैसी दिखने लगी हैं। जब शहरों का बिना साफ़ किया गंदा पानी, कारखानों के रसायन, प्लास्टिक और खेतों से बहकर आई खाद नदियों, झीलों और तालाबों में मिल जाती है, तो जल प्रदूषण होता है। ऐसा पानी पीने से हैजा, टाइफाइड, पीलिया और दस्त जैसे रोग फैलते हैं। मछलियाँ और जलीय जीव मरने लगते हैं। जल को बचाने के लिए गंदे पानी को साफ़ करके छोड़ना चाहिए और किसी भी जल स्रोत में कचरा नहीं डालना चाहिए।
Pradushan Ki Samasya Par Nibandh: प्रदूषण की समस्या पर निबंध 300 शब्द
विज्ञान ने हमें कारखाने, मोटरगाड़ियाँ, बिजली और अनगिनत सुविधाएँ दी हैं, पर इनके साथ एक बड़ी समस्या भी आई है, जिसका नाम है प्रदूषण। आज प्रदूषण केवल बड़े शहरों की नहीं, बल्कि कस्बों और गाँवों की भी समस्या बन चुका है।
प्रदूषण का अर्थ है वातावरण में ऐसे हानिकारक तत्वों का मिल जाना जो मनुष्य, पशु-पक्षियों और पेड़-पौधों को नुकसान पहुँचाते हैं। इन तत्वों को प्रदूषक कहा जाता है। धुआँ, रसायन, प्लास्टिक, कचरा और अत्यधिक शोर सभी प्रदूषक हैं।
प्रदूषण के मुख्य कारण शहरीकरण, औद्योगीकरण और जनसंख्या वृद्धि हैं। सड़कों पर वाहनों की संख्या लगातार बढ़ रही है। कई कारखाने अपना कचरा बिना साफ़ किए नदियों में बहा देते हैं। जंगल काटे जा रहे हैं और प्लास्टिक का कचरा हर जगह फैला है। त्योहारों और समारोहों में तेज़ आवाज़ वाले पटाखे और लाउडस्पीकर ध्वनि प्रदूषण बढ़ाते हैं।
इस समस्या के परिणाम भयानक हैं। वायु प्रदूषण से दमा, फेफड़ों का कैंसर और हृदय रोग बढ़ रहे हैं। दूषित जल से पेट के रोग फैलते हैं। मृदा प्रदूषण से फसलों में ज़हरीले रसायन पहुँचते हैं। ध्वनि प्रदूषण से तनाव और बहरापन होता है। धरती का तापमान बढ़ रहा है, जिसे ग्लोबल वार्मिंग कहते हैं।
इस समस्या का समाधान हम सबके हाथ में है। सरकार ने प्रदूषण रोकने के लिए कानून बनाए हैं, पर उनका पालन नागरिकों को ही करना है। हमें सार्वजनिक परिवहन अपनाना चाहिए, वाहनों की नियमित जाँच करानी चाहिए, प्लास्टिक का प्रयोग छोड़ना चाहिए और अधिक से अधिक पेड़ लगाने चाहिए। किसान जैविक खाद का प्रयोग कर सकते हैं।
यदि हम आज नहीं जागे, तो आने वाली पीढ़ियों को साफ़ हवा और पानी नहीं मिलेगा। प्रदूषण मुक्त भारत बनाना हम सबका कर्तव्य है।
Paryavaran Pradushan Par Nibandh: पर्यावरण प्रदूषण पर निबंध 500 शब्द
प्रस्तावना
पुराने समय में गाँव की नदी का पानी लोग बिना डरे पी लेते थे और रात को आसमान तारों से भरा दिखता था। आज बड़े शहरों में बच्चे तारे गिनना तो दूर, कई दिनों तक साफ़ नीला आसमान भी नहीं देख पाते। यह बदलाव पर्यावरण प्रदूषण का परिणाम है। जब हवा, जल, मिट्टी और वातावरण में ऐसे अवांछित तत्व मिल जाते हैं जो जीवन के लिए हानिकारक हों, तो उसे पर्यावरण प्रदूषण कहते हैं।
प्रदूषण के प्रकार
वायु प्रदूषण: वाहनों, कारखानों और बिजलीघरों के धुएँ, खुले में कचरा और पराली जलाने तथा निर्माण कार्यों की धूल से हवा दूषित होती है। सर्दियों में यही धुआँ कोहरे के साथ मिलकर स्मॉग बन जाता है।
जल प्रदूषण: शहरों का गंदा पानी, कारखानों के रसायन, प्लास्टिक और खेतों से बहकर आए कीटनाशक नदियों, तालाबों और समुद्र को दूषित करते हैं।
मृदा प्रदूषण: रासायनिक खाद और कीटनाशकों का अधिक प्रयोग, प्लास्टिक और औद्योगिक कचरा मिट्टी की उर्वरता नष्ट कर देते हैं।
ध्वनि प्रदूषण: वाहनों के हॉर्न, लाउडस्पीकर, पटाखे, जनरेटर और मशीनों का शोर इसका कारण है। ध्वनि को डेसिबल में मापा जाता है।
प्रदूषण के दुष्परिणाम
प्रदूषण का सबसे बड़ा असर हमारे स्वास्थ्य पर पड़ता है। दूषित हवा से दमा, ब्रोंकाइटिस, हृदय रोग और फेफड़ों का कैंसर होता है। गंदे पानी से हैजा, टाइफाइड और पीलिया फैलते हैं। मिट्टी में मिले रसायन अनाज और सब्ज़ियों के रास्ते हमारे भोजन में पहुँच जाते हैं। लगातार शोर से तनाव, अनिद्रा और उच्च रक्तचाप होता है।
प्रकृति भी इससे बच नहीं पाती। नदियों में मछलियाँ मर रही हैं, पक्षी प्लास्टिक निगल रहे हैं और कई जीवों की प्रजातियाँ लुप्त हो रही हैं। कार्बन डाइऑक्साइड जैसी गैसें धरती का तापमान बढ़ा रही हैं, जिससे लू, अनियमित वर्षा और ग्लेशियरों के पिघलने की समस्या बढ़ी है। सन 1984 की भोपाल गैस त्रासदी, जिसमें एक कारखाने से ज़हरीली गैस रिसने से हज़ारों लोगों की जान गई, औद्योगिक प्रदूषण का दर्दनाक उदाहरण है।
प्रदूषण रोकने के उपाय
भारत में प्रदूषण रोकने के लिए जल अधिनियम 1974, वायु अधिनियम 1981 और पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 जैसे कानून बने हैं। कारखानों को अपना कचरा साफ़ करके ही बाहर छोड़ना चाहिए। शहरों में गंदे पानी को साफ़ करने के संयंत्र होने चाहिए। स्वच्छ ईंधन और बिजली से चलने वाले वाहनों को बढ़ावा देना चाहिए।
नागरिक के रूप में हम बस, मेट्रो और साइकिल का प्रयोग कर सकते हैं, बिजली बचा सकते हैं, कपड़े का थैला रख सकते हैं, गीला और सूखा कचरा अलग कर सकते हैं और बिना पटाखों के त्योहार मना सकते हैं। हर खाली जगह पर पेड़ लगाना सबसे अच्छा उपाय है।
उपसंहार
प्रदूषण मनुष्य की बनाई समस्या है, इसलिए इसका समाधान भी मनुष्य के ही हाथ में है। यदि हम सब घर, विद्यालय और सड़क पर थोड़ी-सी सावधानी रखें, तो आने वाली पीढ़ियाँ भी साफ़ हवा में साँस ले सकेंगी और नदियों का निर्मल जल पी सकेंगी।
Pradushan Par Bhashan: प्रदूषण पर भाषण (2 मिनट)
आदरणीय प्रधानाचार्य जी, सभी शिक्षकगण और मेरे प्यारे साथियों, आज मेरे भाषण का विषय है प्रदूषण, एक ऐसी समस्या जो हमारी हर साँस से जुड़ी है।
साथियों, क्या आपने सर्दियों की सुबह आसमान को धुएँ से ढका हुआ देखा है? क्या आपने किसी नदी या तालाब में प्लास्टिक की बोतलें तैरती देखी हैं? ये छोटी बातें नहीं हैं। ये प्रकृति की चेतावनियाँ हैं।
प्रदूषण का अर्थ है हमारी हवा, पानी, मिट्टी और वातावरण का दूषित हो जाना। गाड़ियों और कारखानों का धुआँ हवा में ज़हर घोलता है। गंदे नाले और रसायन नदियों को बीमार कर रहे हैं। प्लास्टिक और रासायनिक खाद मिट्टी को बंजर बना रहे हैं। और हॉर्न तथा लाउडस्पीकर का शोर हमारे मन की शांति छीन रहा है।
इसकी कीमत हम अपने स्वास्थ्य से चुका रहे हैं। बहुत से बच्चे दमा और एलर्जी से परेशान हैं। गंदे पानी से परिवार के परिवार बीमार पड़ते हैं। पक्षी और जानवर अपने घर खो रहे हैं।
पर मैं केवल बुरी खबर सुनाने नहीं आया हूँ। हम सब इस समस्या का हल बन सकते हैं। पास की जगहों पर हम पैदल या साइकिल से जा सकते हैं। बाज़ार जाते समय कपड़े का थैला ले जा सकते हैं। कमरे से निकलते समय पंखा और बत्ती बंद कर सकते हैं। अपने जन्मदिन पर एक पौधा लगाकर उसकी देखभाल कर सकते हैं।
याद रखिए, सरकार नियम बना सकती है, पर आदतें तो हमें ही बदलनी होंगी। अगर एक विद्यार्थी एक थैली बचा सकता है, तो सोचिए पूरा विद्यालय कितना बड़ा बदलाव ला सकता है।
आइए, आज हम सब मिलकर प्रण लें कि अपनी धरती को स्वच्छ रखेंगे, क्योंकि हमारे पास कोई दूसरी धरती नहीं है। धन्यवाद।
Pradushan Par Nibandh Kaise Likhen: प्रदूषण पर निबंध लिखने के टिप्स
- निबंध की शुरुआत किसी परिचित दृश्य से करें, जैसे धुएँ से ढकी सुबह या प्लास्टिक से भरा तालाब, सीधे परिभाषा से नहीं।
- दूसरे अनुच्छेद में प्रदूषण की सरल परिभाषा दें और बताएँ कि हानिकारक तत्वों को प्रदूषक कहते हैं।
- चारों मुख्य प्रकार अवश्य लिखें: वायु, जल, मृदा और ध्वनि प्रदूषण। छोटे निबंध में हर प्रकार पर एक-दो पंक्तियाँ काफी हैं।
- क्रम रखें: कारण, दुष्परिणाम और उपाय। परीक्षा में शिक्षक इन तीनों बिंदुओं को देखते हैं।
- पर्यावरण, प्रदूषक, स्मॉग, कीटनाशक, डेसिबल, ग्लोबल वार्मिंग और कचरा प्रबंधन जैसे शब्दों का प्रयोग करें।
- कक्षा 9 और 10 के लंबे निबंध में भोपाल गैस त्रासदी 1984 या पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 जैसे पक्के तथ्य जोड़ें, मनगढ़ंत आँकड़े नहीं।
- उपसंहार में बताएँ कि एक विद्यार्थी क्या कर सकता है और एक प्रभावशाली पंक्ति से निबंध समाप्त करें।
यही विषय अंग्रेज़ी में चाहिए? पढ़ें: Essay on Pollution for Students (Air, Water, Soil and Noise)
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रदूषण कितने प्रकार का होता है?
मुख्य रूप से प्रदूषण चार तरह का माना जाता है: वायु, जल, मृदा (भूमि) और ध्वनि प्रदूषण। कुछ पुस्तकों में प्रकाश प्रदूषण, ताप प्रदूषण और प्लास्टिक प्रदूषण को भी अलग प्रकार माना जाता है।
पर्यावरण प्रदूषण के मुख्य कारण क्या हैं?
इसके मुख्य कारण हैं वाहनों और कारखानों का धुआँ, बिना साफ़ किया गंदा पानी, प्लास्टिक कचरा, रासायनिक खाद और कीटनाशक, जंगलों की कटाई और अत्यधिक शोर। तेज़ी से बढ़ती जनसंख्या और शहरीकरण ने इन्हें और बढ़ाया है।
विद्यार्थी प्रदूषण कम करने में कैसे मदद कर सकते हैं?
विद्यार्थी पास की जगहों पर पैदल या साइकिल से जा सकते हैं, बिजली बचा सकते हैं, कपड़े का थैला रख सकते हैं, कचरा अलग-अलग कर सकते हैं और पेड़ लगा सकते हैं। वे घर और मोहल्ले में जागरूकता भी फैला सकते हैं।
ध्वनि प्रदूषण किसे कहते हैं?
जब आवाज़ बहुत तेज़ हो या लंबे समय तक बनी रहे और शरीर तथा मन को नुकसान पहुँचाए, तो उसे ध्वनि प्रदूषण कहते हैं। ध्वनि डेसिबल में मापी जाती है। इससे सिरदर्द, तनाव, नींद की कमी और बहरापन हो सकता है।
प्रदूषण पर निबंध की शुरुआत कैसे करें?
शुरुआत किसी ऐसे दृश्य से करें जिसे पाठक तुरंत समझ सके, जैसे बस का काला धुआँ या कूड़े से भरी नदी। उसके बाद प्रदूषण की एक पंक्ति की परिभाषा दें और बताएँ कि आप किन प्रकारों पर लिखेंगे।
हर निबंध और भाषण हमारी टीम ने लिखा और जाँचा है। कोई गलती दिखे तो हमें बताएँ। हम कैसे लिखते हैं।