Diwali Par Nibandh: दीपावली पर निबंध हिंदी में (10 पंक्तियाँ और निबंध)
दीयों, रंगोली और मिठाइयों वाले रोशनी के त्योहार पर लिखना हो, तो Diwali par nibandh (दीवाली पर निबंध) का यह पेज छोटे बच्चों से लेकर दसवीं कक्षा तक सबके काम आएगा। छोटी कक्षाओं के लिए आसान वाक्यों वाली 10 पंक्तियाँ और कक्षा 5 के लिए थोड़ी विस्तृत पंक्तियाँ हैं, साथ ही दीवाली का एक अनुच्छेद, 100 से 500 शब्दों तक के पाँच निबंध और प्रार्थना सभा में बोलने लायक 2 मिनट का भाषण भी है।
निबंध लिखते समय अपने घर की दीवाली की कोई एक सच्ची बात जोड़ दें, जैसे आपकी बनाई रंगोली या दादी के लड्डू, तो निबंध और भी अपना लगेगा। अंग्रेज़ी में दीवाली पर लिखने के लिए Essay on Diwali पेज देखें।
Diwali Par Nibandh 10 Lines: दीवाली पर 10 पंक्तियाँ
- दीवाली रोशनी का त्योहार है और मुझे यह बहुत पसंद है।
- यह त्योहार हर साल अक्टूबर या नवंबर में आता है।
- त्योहार आने से पहले हम सब मिलकर घर का हर कोना चमकाते हैं।
- मेरी माँ दरवाज़े पर सुंदर और रंग-बिरंगी रंगोली बनाती हैं।
- शाम को हम मिट्टी के छोटे-छोटे दीये जलाते हैं।
- दीयों की रोशनी से हमारा घर और गली चमक उठते हैं।
- इस दिन हम नए कपड़े पहनते हैं और मिलकर पूजा करते हैं।
- हम लड्डू और बर्फी पड़ोसियों और दोस्तों में बाँटते हैं।
- मैं तेज़ आवाज़ वाले पटाखे नहीं चलाता, क्योंकि जानवर डरते हैं।
- दीवाली हमें प्यार, खुशी और मिल-जुलकर रहना सिखाती है।

10 Lines on Diwali in Hindi: कक्षा 5 के लिए दीपावली पर 10 पंक्तियाँ
- दीपावली भारत के सबसे बड़े और सबसे लोकप्रिय त्योहारों में से एक है।
- दीपावली शब्द का अर्थ है दीपों की पंक्ति या दीयों की कतार।
- यह कार्तिक महीने की अमावस्या को मनाई जाती है, जो सबसे अँधेरी रात होती है।
- यह त्योहार एक पुरानी कथा की याद दिलाता है, जिसमें एक राजकुमार चौदह वर्ष बाद अयोध्या लौटे थे।
- उनके स्वागत में लोगों ने पूरे नगर को दीयों से सजा दिया था।
- दीपावली पाँच दिनों का उत्सव है, जो धनतेरस से शुरू होकर भाई दूज पर समाप्त होता है।
- लोग हफ़्तों पहले से घरों की सफ़ाई, रंगाई और सजावट शुरू कर देते हैं।
- बाज़ारों में कपड़े, बर्तन, मिठाइयाँ, दीये और उपहार खरीदने वालों की भीड़ रहती है।
- दीवाली की रात परिवार घर पर पूजा करते हैं और फिर रिश्तेदारों से मिलने जाते हैं।
- कम धुएँ और कम शोर वाली हरित दीवाली ही सबसे अच्छी दीवाली है।
Diwali Ka Nibandh: दीवाली पर निबंध 100 शब्द
हर साल अक्टूबर या नवंबर में दीवाली का त्योहार हमारे घरों में उजाला और खुशियाँ लेकर आता है। इसे दीपावली भी कहते हैं। यह अँधेरे पर रोशनी की और बुराई पर अच्छाई की जीत का पर्व है।
त्योहार से कुछ दिन पहले लोग घरों की सफ़ाई करते हैं और उन्हें फूलों, बत्तियों और रंगोली से सजाते हैं। दीवाली की शाम सब मिलकर पूजा करते हैं और दरवाज़ों, खिड़कियों और छतों पर दीये जलाते हैं। बच्चे नए कपड़े पहनते हैं और मिठाइयाँ खाते हैं।
मुझे दीवाली इसलिए पसंद है क्योंकि इस दिन पूरा परिवार एक साथ होता है।
Diwali Essay in Hindi 150 Words: दीवाली पर निबंध 150 शब्द
भारत में बच्चे साल भर दीवाली की राह देखते हैं। दीपावली कार्तिक मास की अमावस्या को आती है। अमावस्या की रात सबसे अँधेरी होती है, इसलिए लोग हज़ारों दीये जलाकर उसे जगमगा देते हैं।
एक पुरानी कथा के अनुसार, जब अयोध्या के राजकुमार चौदह वर्ष बाद घर लौटे, तब नगरवासियों ने दीप जलाकर उनका स्वागत किया था। तभी से यह पर्व अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है।
दीवाली की तैयारी कई दिन पहले शुरू हो जाती है। घरों की पुताई होती है और दरवाज़ों पर गेंदे के फूलों और आम के पत्तों के तोरण लगाए जाते हैं। मुख्य दिन सब लोग नए कपड़े पहनते हैं। शाम को परिवार घर पर पूजा करता है, दीये जलाता है और रंग तथा फूलों की पंखुड़ियों से रंगोली बनाता है। रिश्तेदारों और पड़ोसियों को मिठाई और सूखे मेवे दिए जाते हैं।
दीवाली हमें सिखाती है कि मन से क्रोध और दुख का अँधेरा हटाकर दया की रोशनी फैलाएँ।
Paragraph on Diwali in Hindi: दीवाली पर अनुच्छेद
दीवाली मेरा सबसे प्रिय त्योहार है। इसके आने से एक हफ़्ता पहले ही मैं, मेरी बहन और मम्मी घर का हर कोना साफ़ करने में जुट जाते हैं। पापा बाज़ार से नए कपड़े, मिट्टी के दीये और मिठाई का बड़ा डिब्बा लाते हैं। दीवाली की शाम मैं मुख्य दरवाज़े पर सफ़ेद, लाल और पीले रंग से मोर वाली रंगोली बनाती हूँ। सूरज ढलते ही हम खिड़कियों और मुंडेरों पर दीये सजाते हैं और परिवार के साथ छोटी-सी प्रार्थना करते हैं। इसके बाद हम दादा-दादी और पड़ोसियों के घर घर के बने लड्डू और चकली लेकर जाते हैं। पूरी कॉलोनी को छोटी-छोटी लौ से चमकते देखना मुझे बहुत अच्छा लगता है। मेरे लिए दीवाली का अर्थ है रोशनी, प्यार और अपनों का साथ।
Dipawali Par Nibandh: दीपावली पर निबंध 200 शब्द
जब बरसात विदा हो जाती है और रातें हल्की ठंडी होने लगती हैं, तब पूरा देश अपने सबसे उजले त्योहार की तैयारी में लग जाता है। दीपावली कार्तिक अमावस्या को, दशहरे के लगभग तीन सप्ताह बाद, मनाई जाती है। हिंदू, सिख और जैन समुदाय इसे अपनी-अपनी परंपराओं के साथ मनाते हैं।
इस पर्व से जुड़ी सबसे प्रसिद्ध कथा एक राजकुमार की है, जो चौदह वर्ष वन में बिताकर अयोध्या लौटे थे। खुशी से भरे नगरवासियों ने उनके रास्ते में दीयों की कतारें सजा दीं। आज वही दीये अँधेरे पर प्रकाश और अज्ञान पर ज्ञान की विजय के प्रतीक हैं।
दीपावली का उत्सव पाँच दिन चलता है। पहला दिन धनतेरस है, जब लोग नए बर्तन या सोना-चाँदी खरीदते हैं। मुख्य रात को परिवार पूजा करते हैं, दीये और मोमबत्तियाँ जलाते हैं और कंदील टाँगते हैं। कई व्यापारी इस अवसर पर नए बही-खाते शुरू करते हैं। रिश्तेदार एक-दूसरे से मिलते हैं, उपहारों का लेन-देन होता है और थालियाँ पकवानों से भर जाती हैं। उत्सव का अंत भाई दूज से होता है।
दीपावली पुराने झगड़े भुलाकर नई शुरुआत करने का अवसर है। कम शोर और कम धुएँ के साथ मनाई गई दीवाली ही सबके घर तक उजाला पहुँचाती है।
Diwali Nibandh in Hindi: दीवाली पर निबंध 300 शब्द
दीवाली की रात किसी भी भारतीय शहर या गाँव में घूमिए, एक अनोखा दृश्य दिखाई देगा। छतों पर मिट्टी के दीये टिमटिमाते हैं, बालकनियों से रंगीन बत्तियों की लड़ियाँ लटकती हैं और हर दरवाज़े पर रंगोली मेहमानों का स्वागत करती है। रोशनी का यह पर्व भारत के अलावा नेपाल, सिंगापुर, मलेशिया, मॉरीशस और दुनिया भर में बसे भारतीयों के बीच भी धूमधाम से मनाया जाता है।
दीवाली कार्तिक मास की अमावस्या को आती है, जो प्रायः अक्टूबर या नवंबर में पड़ती है। इसकी सबसे जानी-मानी कथा एक राजकुमार के चौदह वर्ष के वनवास के बाद अयोध्या लौटने की है। उस दिन लोगों ने दीप जलाकर खुशी मनाई और यह परंपरा सदियों से चली आ रही है। यह पर्व खरीफ़ की फ़सल कटने के बाद आता है, इसलिए किसानों के लिए भी यह खुशहाली का समय है।
यह उत्सव पाँच दिनों में फैला है। धनतेरस पर घर के लिए कुछ नया खरीदा जाता है। छोटी दीवाली पर घरों में पहले दीये जलते हैं। तीसरा दिन मुख्य दीवाली का है, जिसमें शाम की पूजा, दीपमाला और स्वादिष्ट भोजन होता है। चौथे दिन गोवर्धन पूजा होती है, जब कई परिवार अन्नकूट यानी अनेक पकवानों का भोग बनाते हैं। पाँचवाँ दिन भाई दूज भाई-बहन के प्रेम का पर्व है।
दीवाली का सामाजिक महत्व भी है। दुकानदार, दीये बनाने वाले कुम्हार और कंदील बनाने वाले कारीगर इन दिनों अच्छी कमाई करते हैं। पुराने मित्र मिलते हैं और मिठाई की एक थाली कई गिले-शिकवे दूर कर देती है।
लेकिन तेज़ पटाखे हवा को ज़हरीला बनाते हैं और पक्षियों, पशुओं, बच्चों और बुज़ुर्गों को डराते हैं। दीयों, फूलों और घर की मिठाइयों वाली हरित दीवाली भी उतनी ही आनंद भरी होती है।
Diwali Par Nibandh Hindi Mein: दीपावली पर निबंध 500 शब्द
प्रस्तावना
पहला दीया जलने से बहुत पहले ही हवा में दीवाली की खुशबू घुल जाती है। बाज़ारों में रौनक बढ़ जाती है, घरों से ताज़े रंग की गंध आने लगती है और बच्चे कैलेंडर पर दिन गिनने लगते हैं। दीपावली प्रकाश का पर्व है। यह पूरे भारत में कार्तिक मास की अमावस्या को मनाया जाता है, जो अक्टूबर या नवंबर में पड़ती है।
दीपावली का अर्थ और महत्व
दीपावली संस्कृत के दो शब्दों दीप और आवली से बना है, जिसका अर्थ है दीपों की पंक्ति। यह पर्व एक पुरानी कथा से जुड़ा है, जिसमें एक राजकुमार चौदह वर्ष बाद अयोध्या लौटे और पूरा राज्य उनके स्वागत में दीपों से जगमगा उठा। समय के साथ दीपावली अँधेरे पर उजाले, असत्य पर सत्य और निराशा पर आशा की जीत का प्रतीक बन गई। सिख और जैन समुदाय भी इस दिन को अपनी परंपराओं के अनुसार मनाते हैं।
पाँच दिनों का उत्सव
दीपावली एक दिन का नहीं, पाँच दिनों का त्योहार है। धनतेरस पर लोग शुभ मानकर नए बर्तन या थोड़ा सोना-चाँदी खरीदते हैं। छोटी दीवाली पर सुबह जल्दी स्नान, बची हुई सफ़ाई और शाम को पहले दीये जलाने की परंपरा है। मुख्य दीवाली की रात परिवार मिलकर पूजा करते हैं, दीयों की कतारें सजाते हैं और साथ बैठकर भोजन करते हैं। अगले दिन गोवर्धन पूजा होती है और कई घरों में अन्नकूट बनता है। गुजरात में यही दिन नए वर्ष के रूप में मनाया जाता है। अंत में भाई दूज आती है, जब बहनें भाइयों के माथे पर तिलक लगाती हैं और भाई उन्हें उपहार देते हैं।
दीवाली कैसे मनाई जाती है
घरों की सफ़ाई और पुताई होती है और उन्हें गेंदे की मालाओं, कंदीलों और रंगोली से सजाया जाता है। लोग नए कपड़े पहनते हैं और एक-दूसरे को मिठाई और मेवे के डिब्बे भेंट करते हैं। व्यापारी नए बही-खाते शुरू करते हैं। सबसे बढ़कर, दीवाली परिवार के मिलन का पर्व है। दूर शहरों में पढ़ने या काम करने वाले लोग भी इन दिनों घर लौट आते हैं। विद्यालयों में दीवाली से पहले दीया सजाने, रंगोली बनाने और कंदील बनाने की प्रतियोगिताएँ होती हैं। गाँवों में लोग घर के आँगन को गोबर और मिट्टी से लीपते हैं और कुम्हारों से नए दीये खरीदते हैं। कई जगह मेले भी लगते हैं, जहाँ बच्चे खिलौने और मिठाइयाँ खरीदते हैं।
सुरक्षित और हरित दीवाली
त्योहार की खुशी किसी के दुख का कारण नहीं बननी चाहिए। पटाखों का धुआँ बच्चों, बुज़ुर्गों और साँस के रोगियों के लिए हानिकारक है और उनका शोर कुत्तों, गायों और पक्षियों को डरा देता है। हमें प्लास्टिक की बत्तियों की जगह मिट्टी के दीये, रासायनिक रंगों की जगह फूलों की रंगोली चुननी चाहिए और पटाखे बहुत कम या बिल्कुल नहीं चलाने चाहिए। जलते दीयों को पर्दों से दूर रखें और पास में पानी और रेत रखें।
उपसंहार
दीवाली तभी सच्ची है जब उसकी रोशनी हर घर तक पहुँचे। किसी पड़ोसी के साथ मिठाई बाँटना, किसी गरीब परिवार के घर दीया जलाना या किसी अकेले बुज़ुर्ग के साथ त्योहार मनाना ही इस पर्व की असली पूजा है। आइए, हम बाहर दीये जलाएँ और भीतर दया और प्रेम का उजाला फैलाएँ।
Diwali Speech in Hindi: दीवाली पर भाषण (2 मिनट)
आदरणीय प्रधानाचार्य जी, सभी शिक्षकगण और मेरे प्यारे साथियों,
आज मैं उस त्योहार के बारे में बोलने आई हूँ, जो साल की सबसे अँधेरी रात को सबसे उजली रात बना देता है। जी हाँ, मैं बात कर रही हूँ रोशनी के पर्व दीवाली की।
क्या आपने कभी किसी आम अमावस्या की रात आसमान देखा है? चारों ओर बस अँधेरा होता है। लेकिन दीवाली की अमावस्या को वही रात करोड़ों दीयों से जगमगा उठती है। यह परंपरा बहुत पुरानी है। कहते हैं कि जब एक राजकुमार चौदह वर्ष बाद अयोध्या लौटे, तब लोगों ने हर रास्ते पर दीये रखकर उनका स्वागत किया था।
दीवाली पाँच दिनों का पर्व है। धनतेरस से शुरुआत होती है और भाई दूज पर समापन। इन दिनों हमारे घर चमक उठते हैं, आँगन में रंगोली सजती है और रसोई से लड्डू, चकली और गुजिया की खुशबू आती है। हम नए कपड़े पहनते हैं, परिवार के साथ पूजा करते हैं और रिश्तेदारों से मिलने जाते हैं।
पर साथियों, इन दीयों का असली संदेश क्या है? एक छोटा-सा दीया पूरी रात अँधेरे से लड़ता है। उसी तरह हम सब भी अपने भीतर के क्रोध, आलस और स्वार्थ के अँधेरे को थोड़ी-सी रोशनी से हरा सकते हैं।
एक सवाल और। अगर कोई डरा हुआ कुत्ता गाड़ी के नीचे छिपा हो या कोई बीमार दादाजी शोर से सो न पाएँ, तो क्या वह सच्चा उत्सव है? आइए, इस बार हरित दीवाली मनाएँ। ज़्यादा दीये जलाएँ, कम पटाखे चलाएँ और अपनी मिठाई उनके साथ बाँटें जिनके पास कम है।
याद रखिए, सबसे सुंदर दीया वह है जो किसी और के घर में उजाला करे।
आप सभी को दीवाली की हार्दिक शुभकामनाएँ। धन्यवाद।
Diwali Par Nibandh Kaise Likhen: दीवाली पर निबंध लिखने के टिप्स
- निबंध की शुरुआत किसी दृश्य से करें, जैसे दीयों से जगमगाती गली या रसोई से आती पकवानों की खुशबू, सीधी परिभाषा से नहीं।
- मूल तथ्य ज़रूर लिखें: दीवाली कार्तिक अमावस्या को, प्रायः अक्टूबर या नवंबर में, पाँच दिनों तक मनाई जाती है।
- एक-दो पंक्तियों में अर्थ बताएँ: अँधेरे पर प्रकाश और बुराई पर अच्छाई की जीत, जो एक राजकुमार के अयोध्या लौटने की पुरानी कथा से जुड़ी है।
- असली बातें लिखें: घर की सफ़ाई, मिट्टी के दीये, रंगोली, गेंदे के तोरण, नए कपड़े, मिठाइयाँ और रिश्तेदारों से मिलना।
- 300 या 500 शब्दों के निबंध में प्रस्तावना, अर्थ, पाँच दिन, उत्सव, हरित दीवाली और उपसंहार जैसे शीर्षक लगाएँ।
- सुरक्षित और प्रदूषण-मुक्त दीवाली पर कुछ पंक्तियाँ अवश्य जोड़ें: कम पटाखे, कम शोर और पशु-पक्षियों का ध्यान।
- अंत में कोई संदेश दें, जैसे दया और प्रेम की रोशनी फैलाना, पहली पंक्ति को दोहराएँ नहीं।
यही विषय अंग्रेज़ी में चाहिए? पढ़ें: Essay on Diwali for Students (10 Lines, Short and Long Essays)
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
दीवाली कब मनाई जाती है?
दीवाली हिंदू पंचांग के कार्तिक मास की अमावस्या को मनाई जाती है। यह प्रायः अक्टूबर या नवंबर में पड़ती है और दशहरे के लगभग तीन सप्ताह बाद आती है।
दीवाली को प्रकाश का पर्व क्यों कहते हैं?
इस रात लोग अपने घरों के अंदर और बाहर मिट्टी के दीये, मोमबत्तियाँ और बिजली की लड़ियाँ जलाते हैं। दीपावली शब्द का अर्थ ही दीपों की पंक्ति है। ये दीप अँधेरे पर उजाले की जीत के प्रतीक हैं।
दीवाली के पाँच दिन कौन-से हैं?
पाँच दिन हैं: धनतेरस, छोटी दीवाली, मुख्य दीवाली, गोवर्धन पूजा और भाई दूज। हर दिन की अपनी परंपरा है, जैसे धनतेरस पर नए बर्तन खरीदना और भाई दूज पर बहनों का भाइयों को तिलक लगाना।
कक्षा 1 या 2 के लिए दीवाली पर 10 पंक्तियाँ कैसे लिखें?
छोटे और आसान वाक्य लिखें। दीवाली कब आती है, घर की सफ़ाई, दीये, रंगोली, नए कपड़े, मिठाई और आपको यह त्योहार क्यों अच्छा लगता है, इन बातों पर एक-एक पंक्ति लिखें। ऊपर दिया गया पहला सेट कक्षा 1 से 3 के लिए ही है।
हरित दीवाली कैसे मनाएँ?
मिट्टी के दीये जलाएँ, फूलों और प्राकृतिक रंगों से सजावट करें और मिठाई घर पर बनाएँ। पटाखे कम या बिल्कुल न चलाएँ ताकि हवा साफ़ रहे और जानवर न डरें। ज़रूरतमंद लोगों को मिठाई और कपड़े देकर अपनी खुशी बाँटें।
हर निबंध और भाषण हमारी टीम ने लिखा और जाँचा है। कोई गलती दिखे तो हमें बताएँ। हम कैसे लिखते हैं।